* बिना विदर्भ के विकास संभव नहीं।
* हर बार हो रहा सौतेला व्यवहार।
पृथक विदर्भ के आंदोलन का शंखनाद हो चुका है। जिसके तहत पहला विदर्भ स्तरीय आंदोलन नागपुर में होने वाले विधान सभा के शीतसत्र के पहले ९ दिसंबर को करने का निर्णय विदर्भवादी नेता कई बार पत्रपरिषद द्वारा जानकारी दी गई है।
जांबुवंतराव धोटे , आर.पी.आई. के ऱाष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठवले तथा विधायक अनिल बोंडे के मार्गदर्शन में पृथक विदर्भ के मांग एवं लड़ाई के लिए ५ सूत्रीय कार्यक्रम तयार किया गया है , जिसके तहत पहले स्कूल , कॉलेजों में जनजागृती कार्यक्रम चलाया जायेगा , तीसरे चरण में २८ दिसंबर को नागपुर करार चलाया जाएगा. बाद में विदर्भ राज्य के बजट व अन्य रूप – रेखा बनाई जायेगी , आखरी चरण में विधान सभा के शीतसत्र में आंदोलन किया जायेगा।
सूत्रो की माने तो विदर्भ का अत्यंत पिछड़ा व अविकसित क्षेत्र है, महाराष्ट्र का ३२ प्रतिशत भूभाग विदर्भ में है, तो २२ प्रतिशत आबादी में विदर्भ की अपनी सांस्कृतिक विरासत है, और अपना समृद्ध इतिहास है , जो महाभारत के समय से प्रारंभ होता है। विदर्भ हमेशा स्वतंत्र राज्य रहा है। आधुनिक इतिहास में सन १८५३ में पहली बार ब्रिटोशो नें नागपूर प्रोविन्स कि स्थापना की और उसके बाद सन १८६१ में नागपूर शहर को सेंट्रल प्रोविन्स की राजधानी बनाया गया। सन १९०३ से लेकर १९५० तक नागपूर ही मध्य भारत ही प्रांत की राजधानी थी जब भारत में राज्यो का पुनर्गठन हुआ तब फजल अली कमीशन ने २९ सितंबर १९५३ को विदर्भ का स्वतंत्र राज्य देने की सिफारिश की थी।
स्वतंत्र भारत में नागपूर अकेला ऐसा शहर है जिसने अपने सैकडो वर्ष के इतिहास में पहली बार अपना राजधानी का दर्जा खो दिया। विदर्भ के ऊपर हुए इस अन्याय के कारण ही ” नाग विदर्भ ” आंदोलन समिती की स्थापना हुई जिसने स्वतंत्र विदर्भ के लिए पहली लड़ाई लड़ी चुनाव जीते लेकिन की जनता का सपना पूरा नही हुआ । विशेष विदर्भ महात्मा गांधी व विनोभा भावे महा कवी भवभूति , देवतुल्यों में गोंदिया जिले के ग्राम कामठा के लहरी बाबा , नागपूर के ताजुद्दीन बाबा के चमत्कारों से विदर्भ ही नही बल्की पूरा भारत वर्ष परिचित है और पहचाने जाते है। इसीलिए विदर्भ विरोने उन्ही के रास्तो पर चलते हुए पूरी तरह अहिंसक आंदोलन चलाते रहने का निश्चय किया है।
विदर्भ के सारे छोटे बड़े नेताओं की माने तो पृथक विदर्भ बनाना समय की जरुरत है। अलग विदर्भ राज्य के बगैर यहाँ का विकास असंभव है। सरकार को चाहिए तेलंगाना के साथ ही पृथक विदर्भ राज्य का निर्माण किया जाना चाहिए हाल ही में गोंदिया के विदर्भवादी नेताओ के नेतृत्व में पालकमंत्री अनिल देशमुख को ज्ञापन सौपकर पृथक विदर्भ की मांग की है।
*३५,००० हजार आत्महत्यार :- सूत्रो माने तो २ करोड़ ७० लाख की जनसंख्या वाले विदर्भ राज्य का गठन हुआ तो ३ से ५ वर्ष के बिच ही विदर्भ देश का १ नंबर का राज्य बन सकता है , यह क्षमता विदर्भवादी सर्वदलीय जनप्रतिनिधियों में है। यदी ऐसा नहीं हुआ तो पिछले १६ वर्षो के अन्याय व अनदेखी के वजह ३५,००० हजार किसानों कि आत्महत्या २३,००० बालकों की कुपोषण के कारण मौत, लाखो युवक बेरोजगार ऐसे अनेक समस्या को यदी हल करना है तो पृथक विदर्भ दहाड़ जरुरी है।
* पृथक विदर्भ बनने लगातार आई दिक्कते :- सन १९६० में महाराष्ट्र का गठन हुआ १९६२ में चीन का आक्रमण , १९६४ में पंडित जवाहरलाल नेहरु का निधन , १९६५ में पाकिस्तान से युद्ध व महाराष्ट्र मे नेतृत्व परिवर्तन ,१९६६ में लालबहादुर शास्त्री का निधन , इसके बाद इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनते ही १९६७ में फिर से पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ ऊपर से १९७५ तक विदर्भ के ही नेता को राज्य का मुख्य मंत्री पद बहाल किया गया। १९७५ से १९७७ तक के दौर में देश में कही भी आंदोलन नहीं हुए। १९७१ में आसाम का विभाजन कर मेघालय , मिझोरम , अरुणाचल का गठन किया गया सन २,००० में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने छत्तीसगड़ , उत्तराखंड , और झारखंड का निर्माण किया।
अब अनेक समस्याओं का एक उत्तर है विदर्भ राज्य का गठन , पता चला है की विदर्भविरों ने विदर्भ के सर्वदलीय पूर्व और वर्तमान सांसदो विधायको व जनप्रतिनिधियों को आगे बढ़ने की जरुरत है तब ही पृथक विदर्भ का सपना पूरा हो गया।
* महादेवराव शिवणकर ( पूर्व वित्त मंत्री ) :- समर्थन है किसानो के हित बेरोजगारों को रोजगार के लिए सिंचाई के संबंध में हो रहे अन्याय को खत्म करने के लिए , हमारा विदर्भ हर क्षेत्र नें परिपूर्ण है जैसे अच्छी जमीन , अच्छे जंगल , मैग्नीज , लोहा , सिमेंट बनाने वाले पत्थर ऐसे अनेक प्राकृती संपदा से परिपूर्ण है , इसीलिए पृथक विदर्भ की मांग जाएज है और शासन ने गंभीरता से विचार करना चाहिए जैसे छत्तीसगड़ अलग हो कर सुखी हो गया हमारा विदर्भ हो कर सुखी और संपन्न होगा।
* केशवराव मानकर (पूर्व विधान परिषद सदस्य ) :- हमारा पूरा समर्थन है, विकास के लिए हमारे पास मंत्रालय की बेसिक सुख सुविधाये तयार है , शासन की मंजूरी चाहिए जिस तरह तेलंगाना को अलग राज्य बनाया गया है इसी तरह हमें भी अपना हक चाहिए यदि ऐसा नहीं हुआ तो बार फिर विदर्भवासियों के साथ अन्याय होगा।
* डॉ. मनमोहन सोनी (पूर्व जिला संघ चालक ) :- राष्ट्रीय स्वयं संघ ने पहले से ही व्यवस्था की दृष्टी से विदर्भ को अलग प्रांत माना है , आम जनता के सुख सुविधा एवं सर्वांगिन विकास हेतु विदर्भ प्रांत बनना ही चाहिए। यदि ऐसा होता है तो पुरे भारत वर्ष में विदर्भ की एक अलग पहचान होगी।
* सुरेन्द्र नायडू ( शिवसेना तालुका प्रमुख ) :- केंद्र और राज्य सरकार का ही सपना है की ” छोटा परिवार सुखी परिवार ” इस उद्देश का हम समर्थन करते है और इसको आधार बनाते हुए हम भी चाहते है हमारा ” छोटा विदर्भ परिवार ” अलग चाहिए क्यों की हम भी सुखी रहना चाहते है।
:: रीतेश अग्रवाल
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