Published On : Thu, Jun 4th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

श्रीसूर्या घोटाले का सच होगा बेनकाब? 13 साल बाद मुकदमा अंतिम पड़ाव पर

13 साल बाद अंतिम चरण में पहुंचा विदर्भ का चर्चित निवेश घोटाला, 5 हजार निवेशकों की निगाहें अदालत पर
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नागपुर टुडे : विदर्भ के सबसे बड़े और चर्चित निवेश घोटालों में शामिल श्रीसूर्या निवेश महाघोटाला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। करीब 13 वर्षों से अदालत में चल रही सुनवाई के बाद मामला अब अंतिम चरण में है। विशेष एमपीआईडी (MPID) न्यायालय में लंबित इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने अपने सभी 75 गवाहों की मुख्य गवाही पूरी कर ली है। अब केवल दो जांच अधिकारियों की जिरह शेष है, जिसके बाद मामला अंतिम बहस और फैसले के लिए तैयार हो जाएगा।

करीब 5 हजार निवेशकों से जुड़े इस कथित ₹200 करोड़ के घोटाले में अदालत का फैसला हजारों परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्षों से अपनी जमा-पूंजी वापस मिलने और दोषियों को सजा मिलने की उम्मीद लगाए बैठे निवेशकों की निगाहें अब न्यायालय पर टिकी हैं।

25 से 40 प्रतिशत रिटर्न का लालच

अभियोजन पक्ष के अनुसार, श्रीसूर्या ग्रुप के प्रमुख आरोपी समीर सुधीर जोशी ने निवेशकों को 25 से 40 प्रतिशत तक वार्षिक रिटर्न का प्रलोभन दिया था। इसके लिए एजेंटों का व्यापक नेटवर्क तैयार किया गया और शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश संबंधी सेमिनार आयोजित कर लोगों को कम समय में अधिक मुनाफे का सपना दिखाया गया।

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शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को भुगतान कर विश्वास कायम किया गया, लेकिन बाद में निवेशकों को न तो वादा किया गया लाभ मिला और न ही उनकी मूल राशि वापस की गई। शिकायतों के बढ़ने पर कथित तौर पर ₹200 करोड़ से अधिक के वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ।

कारोबार की आड़ में निवेशकों का भरोसा

जांच एजेंसियों के मुताबिक, श्रीसूर्या ग्रुप ने निर्माण, डेयरी, अस्पताल, परिवहन, जिम, रेस्टोरेंट, बीमा और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर निवेशकों का विश्वास अर्जित किया। आरोप है कि इसी मजबूत कारोबारी छवि का उपयोग कर बड़ी संख्या में लोगों से निवेश के नाम पर धन एकत्र किया गया।

आठ वर्ष जेल में रहा मुख्य आरोपी

मामले के मुख्य आरोपी समीर जोशी को 15 अक्टूबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। वह करीब आठ वर्षों तक जेल में रहा और वर्ष 2021 में उसे जमानत मिली। वर्तमान में मामले के सभी आरोपी जमानत पर हैं, जबकि मुकदमे की सुनवाई जारी है।

25 आरोपियों पर गंभीर धाराएं

विशेष एमपीआईडी न्यायालय ने समीर जोशी, उसकी पत्नी पल्लवी जोशी सहित कुल 25 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (पूर्व आईपीसी) की गंभीर धाराओं—406, 409, 420, 201 और 34 के अलावा एमपीआईडी अधिनियम तथा भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।

ऐतिहासिक फैसले की उम्मीद

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गवाहियों की प्रक्रिया लगभग पूरी होने के बाद यह मामला महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच चुका है। आने वाला फैसला न केवल हजारों निवेशकों के लिए अहम होगा, बल्कि आर्थिक अपराधों और निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल भी बन सकता है।

करीब 13 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे निवेशकों के लिए यह मुकदमा सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनकी जीवनभर की बचत, टूटे सपनों और न्याय की उम्मीद से जुड़ा हुआ है। अब सबकी निगाहें उस फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि करोड़ों रुपये के इस कथित महाघोटाले में दोषी कौन है और कानून का शिकंजा किस हद तक कसता है।

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