Published On : Wed, Aug 13th, 2014

वाशिम जिले को सूखाग्रस्त घोषित करें


जिला परिषद की मांग, सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित

वाशिम

washim sukhagrast
वाशिम जिला परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग राज्य सरकार से की है. 11 अगस्त को हुई सभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि बहुत कम बारिश होने और दोबारा-तिबारा बुआई करने से किसानों के साथ ही आम आदमी भी परेशान हो गया है.

महिला और बाल कल्याण विभाग की सभापति ज्योतिताई गणेशपुरे ने यह प्रस्ताव पेश किया और जि.प. सदस्य देवेंद्र ताथोड ने उसका अनुमोदन किया. जि.प. अध्यक्ष कु. सोनालीताई जोगदंड, उपाध्यक्ष चंद्रकांत ठाकरे, शिक्षा व स्वास्थ्य सभापति चक्रधर गोटे, समाज कल्याण सभापति पानुबाई जाधव, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुभाष पवार और जिला ग्रामीण विकास विभाग के प्रकल्प संचालक वानखेड़े मंच पर उपस्थित थे.

बैठक में अनेक विषयों पर चर्चा की गई. इसमें रास्ते, पुराने वाहनों की नीलामी और नए वाहनों की खरीदी, केनवड स्थित जलापूर्ति योजना, स्वास्थ्य केंद्र आदि शामिल थे. पशुसंवर्धन विभाग की कामधेनु योजना और स्कूल में उपस्थित नहीं होने वाले शिक्षकों के मुद्दे पर काफी देर तक बहस होती रही. काम में लापरवाही बरतनेवाले कर्मचारियों पर उचित कार्रवाई करने का सुझाव उपाध्यक्ष चंद्रकांत ठाकरे ने दिया. लेकिन पंचायत विभाग के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय इंगले ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा. बैठक में सभी पदाधिकारियों ने विभाग प्रमुखों को आदेश दिया कि चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा विकास कार्य कर निधि खर्च कर दी जाए.


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सभा में जि.प. सदस्य विकास गवली, सचिन रोकड़े, वित्त व लेखा अधिकारी हिवाले, ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता एस. के. शेगांवकर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी मेहकरकर, उप अभियंता नीलेश राठोड, शाखा अभियंता कुणाल तायडे, लघुलेखक नागेश थोरात, उमेश बोरकर, जि.प. के जनसंपर्क अधिकारी राम श्रृंगारे, सहायक विलास मोरे, सहायक लेखाधिकारी प्रकाश टीके सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे. सभा का संचालन सामान्य प्रशासन विभाग के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी योगेश जवादे ने किया.