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    Published On : Fri, Feb 21st, 2020

    रविभवन में आगंतुकों की सुरक्षा को लेकर कोई चिंतित नहीं

    -आज भी स्थिति जस के तस,ठेकेदार-लोककर्म विभाग के अधिकारी मदमस्त

    नागपुर: नागपुर में देश-विदेश से आने वाले सरकारी सह विशिष्ट मेहमानों को सिविल लाइंस स्थित रविभवन परिसर में उनकी मांग के अनुरूप ठहराया जाता हैं.लेकिन उन आगंतुकों की सुरक्षा को लेकर न राज्य सरकार,न लोककर्म मंत्री और न ही लोककर्म विभाग चिंतित हैं.इसी लापरवाही की वजह से कुछ वर्ष पूर्व एक न्यायाधीश का मृत देह एक कॉटेज में मिला जबकि पोस्टमार्टम के अनुसार २ दिन पूर्व उसकी मृत्यु हो चुकी थी.

    यह घटना न सिर्फ नागपुर बल्कि मुंबई,दिल्ली में काफी गूंजा।जिसके बाद भी इस परिसर की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया.उक्त हादसे के बाद रविभवन की सुरक्षा हेतु पुख्ता इंतजाम तो नहीं किया गया लेकिन किसी का लालबत्ती कायम रखा गया तो किसी को पिली बत्ती देकर पुरस्कृत किया गया.

    राज्य में पिछली सरकार ने राज्य के कई शहरों को स्मार्ट सिटी के तर्ज पर विकसित करने के लिए जगह-जगह सीसीटीवी लगाने का निर्णय लिया।क्या पिछली और वर्त्तमान सरकार को रविभवन,नाग्भावन और विधायक निवास परिसर को सीसीटीवी से लैस करने की जरुरत महसूस नहीं हुई.हुई भी होंगी तो सम्बंधित मंत्री व अधिकारियों ने तहरिज नहीं दी होंगी।क्यूंकि उनकी अतिरिक्त कमाई पर बाधा उत्पन्न हो जाता।

    रविभवन में पहले खुद की सुरक्षा व्यवस्था,कैटरिंग,देखभाल,साफ़-सफाई की सरकारी स्थाई अधिकारी-कर्मी थे.सरकारी व्यवस्था होने से आगंतुकों को वक़्त पर सुविधा नहीं मिल पाती थी,इसलिए वे सभी सिर्फ ठहरने के हिसाब से यहाँ रुकते थे.क्यूंकि अब कुछ वर्षों से सुरक्षा,साफ़-सफाई व कैटरिंग व्यवस्था का निजीकरण कर दिया गया तो सम्बंधित अधिकारियों के जेबें गर्म होने लगी तो दूसरी ओर परिसर की सुरक्षा भगवान भरोसे हो गई.

    सुरक्षा :मासिक ३०६००० रूपए हजम कर रहा ठेकेदार

    रविभवन परिसर में ३ दर्जन के आसपास कॉटेज और ४-५ दर्जन कमरें हैं,रविभवन की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर हैं कि सम्पूर्ण परिसर की सुरक्षा व्यवस्था सँभालने वाले ठेकेदार कंपनी ने एक पारी (८ घंटे के लिए ) ३ कर्मियों के हवाले छोड़ रखी हैं.इन ३-३ कर्मियों को भी शोषण हो रहा,उन्हें १५-१५ हज़ार मासिक वेतन देने की बजाय ६-६ हज़ार थमा रहे.शेष प्रत्येक पारी के ५-५ सुरक्षा रक्षकों का वेतन सीधे तौर पर हज़म किया जा रहा.
    जबकि ठेका शर्तो के अनुसार परिसर में सुरक्षा रक्षक के तैनातगी के लिए प्रत्येक पारी में ८-८ सुरक्षा रक्षकों के लिए जगह चिन्हित किये गए.जिसके लिए २ माह पूर्व निविदा जारी की गई.निविदा शर्तों के हिसाब से प्रत्येक पारी में ८ सुरक्षा रक्षक अर्थात कुल २४ सुरक्षा रक्षक तैनात किया जाना था.शर्तो के हिसाब से १५ हज़ार प्रति कर्मी को मासिक दिया जाना तय हुआ.

    रविभवन के पालक राज्य लोककर्म विभाग हैं,जिसका सहायक अभियंता का कक्ष इसी परिसर में हैं.इस परिसर में स्थाई रूप से ऊर्जा मंत्री व पालकमंत्री नितिन राऊत और राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख का १-१ बंगलों में कार्यालय हैं.पिछले १५ दिन से नए मनपायुक्त तुकाराम मुंढे कॉटेज क्रमांक १० में रुके हुए हैं,वे तब तक यहीं रुकेंगे,जब तक मनपा आयुक्त का बंगला खाली होने के बाद उसकी नए आयुक्त के हिसाब से लीपापोती नहीं हो जाती।
    सुरक्षा रक्षक तैनातगी का निविदा हासिल करने वाले एजेंसी ‘एसएसएफ’ कागजों पर प्रत्येक पारी में ८-८ सुरक्षा रक्षक तैनात कर रही,असल में प्रत्येक पारी में ३-३ सुरक्षा रक्षक के जिम्मे सम्पूर्ण परिसर छोड़ दिया गया हैं.इन ३ सुरक्षा रक्षक के भरोसे खुद को सुरक्षित महसूस करना प्रश्नचिन्ह हैं.क्या लोककर्म विभाग किसी हादसे का इंतजार कर रही ?

    साफ-सफाई का ५० लाख का ठेका,रोजाना सिर्फ २ कर्मी हे हवाले व्यवस्था

    रवि भवन परिसर में २१ बंगले हैं.इस परिसर का पिछले शीतकालीन अधिवेशन के बाद साफ़-सफाई के लिए ५० लाख का ठेका ११ माह के लिए जारी किया गया.शेडके नामक ठेकेदार ने ठेका लिया।ठेका शर्तों के हिसाब से ८ से १२ कर्मी रोजाना परिसर की साफ़-सफाई के लिए तैनात करना था.लेकिन रवि भवन प्रबंधन से सम्बंधित अधिकारियों से गहरी सांठगांठ की वजह से रोजाना सिर्फ २ कर्मियों से ही काम चलाया जा रहा.इन कर्मियों का भी शोषण किया जा रहा.ये रोजाना ८ से ९ घंटे पूर्ण माह काम करते,जिसके बदले उन्हें ८ हज़ार रूपए वेतन के रूप में दिया जाता।आइल अलावा कोई सुविधा नहीं दी जाती।अवकाश लेने पर रोजाना के हिसाब से वेतन काट लिया जाता हैं.

    उल्लेखनीय यह हैं कि एक तरफ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकारी कर्मियों को पारिवारिक,मानसिक सुख देने के उद्देश्य से सप्ताह में ५ दिन कामकाज का अध्यादेश जारी करते और उन्हीं कर्मियों द्वारा इसी राज्य के ठेका श्रमिकों का शोषण किया जाना चिंतनीय हैं.

    उक्त ठेका श्रमिकों के साथ सतत हो रहे अन्याय और रवि भवन,देवगिरि,नाग भवन,विधायक निवास परिसर की और यहाँ ठहरने आने वाले आगंतुकों की सुरक्षा हेतु शहर के होटलों की तर्ज पर सीसीटीवी युक्त सुरक्षा के पूर्ण पुख्ता इंतज़ाम करने की मांग ‘एम.ओ.डी.आई.’ फाउंडेशन के अध्यक्ष महेश दयावान ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे,पालकमंत्री नितिन राऊत,लोकनिर्माण मंत्री से की हैं.और उक्त हालात के दोषी अधिकारियों पर क़ानूनी कार्रवाई सह वर्त्तमान ठेकेदारों को काली सूची की मांग भी की हैं

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