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    Published On : Fri, Aug 29th, 2014
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    यवतमाल : बाजोरिया ने फेरा ठाकरे के मंसूबों पर पानी


    राकांपा जिले में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में


    Sandeep Bajoriya MLC yawatmaal
    यवतमाल

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधानपरिषद सदस्य संदीप बाजोरिया ने यवतमाल विधानसभा चुनाव लड़ने का संकल्प व्यक्त किया है. प्रचार का नारियल भी फोड़ दिया है. इससे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे के मंसूबों पर पानी फिर गया है. बाजोरिया की घोषणा से उन्हें धक्का भी लगा है. इतना ही नहीं, कांग्रेस के भीतर भी हालत कुछ ठीक नहीं है. उन्हीं के नेता पार्टी को हराने की रणनीति बनाने में जुटे हैं.

    उपमुख्यमंत्री पवार के करीबी
    विधायक बाजोरिया को उपमुख्यमंत्री अजित पवार का करीबी माना जाता है. पवार ने बाजोरिया को विधानपरिषद में पहुंचाया तो उन्होंने भी यवतमाल जिले में राकांपा की ताकत को बढ़ाने का काम किया. वैसे भी जिले में दोनों कांग्रेस के संबंध कुछ ठीक नहीं है. फिर बाजोरिया ने कांग्रेस को जिले से बाहर करने का जो अभियान शुरू किया है उसमें उन्हें काफी हद तक सफलता भी मिली है. सहकारी सोसायटियां, जिला बैंक, नगर पालिका, जिला परिषद के साथ ही अनेक ग्राम पंचायतों में राकांपा का कब्जा है. युवाओं की बड़ी भारी फौज बाजोरिया के पीछे खड़ी है.

    अकेले दम पर लड़ने का आग्रह
    बताते हैं कि संदीप बाजोरिया ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ने का आग्रह किया है. पार्टी ने विचार करने का आश्वासन भी दिया है. राकांपा जिले में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रही है.

    ठाकरे के खिलाफ पार्टी में विरोध
    इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे अपने बेटे के राजनीतिक पुनर्वास के लिए यवतमाल विधानसभा सीट की मांग कर रहे हैं. इसके चलते कांग्रेस में उनके खिलाफ विरोध की हवा भी बह रही है. ऐसे में ही संदीप बाजोरिया द्वारा अपने प्रचार का श्रीगणेश करने के चलते कांग्रेस से भी उन्हें मदद मिल सकती है. कहा तो यह भी जाता है कि खुद अजित पवार ने भी संदीप बाजोरिया को हरी झंडी दिखा दी है.

    किसानों से न मिले, न सहानुभूति जताई
    जिले में किसानों का मनोबल गिरा हुआ है. कांग्रेस के नेताओं ने न तो कोई ठोस काम किया है और न ही कोई नेता उन तक पहुंचा ही है. सहानुभूति जताना तो दूर की बात है. इसके ठीक विपरीत, संदीप बाजोरिया ने अनेक योजनाएं क्रियान्वित कर किसानों को दिलासा देने का काम किया है. कांग्रेस के भीतर दूसरी पांत के नेता ही बगावत का बिगुल फूंक रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस की स्थिति इधर कुआं, उधर खाई वाली हो सकती है.


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