Published On : Tue, Apr 4th, 2017

बसपा नेता की दोहरी भूमिका से नगरसेवक वर्ग हतप्रभ !

नागपुर: बसपा ने स्मार्ट सिटी सन्दर्भ में बनने वाली समिति के लिए अपने कोटे का सदस्य तय करने का अधिकार महापौर को दे दिया।वहीँ दूसरी ओर कल संपन्न हुई जोन सभापति के चुनाव में भाजपा-कांग्रेस ने हाथ मिलाकर बसपा के हिस्से का सभापति पद हथिया लिया तो बसपा ने कांग्रेस-भाजपा को आरएसएस का मुखौटा होने का आरोप लगा दिया।

बहुजन समाज पार्टी के मनपा में नेता ने मनपा की पहली आमसभा में सत्तापक्ष से हुए समझौते के आधार पर स्मार्ट सिटी सन्दर्भ में बनने वाली उच्च स्तरीय समिति में बसपा कोटे की सदस्य नियुक्त करने का अधिकार खुद के पास न रखते हुए महापौर को सौंप दिया। इस मामले में बसपा के नगरसेवक का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से इस मामले को लेकर हुई गुप्त समझौते की बू आ रही है.ताकि बसपा नेता पर अन्य नगरसेवक यह आरोप न लगाए कि उक्त समिति में उन्हें समाहित नहीं किया गया.जबकि सच्चाई यह है जिस बसपाई नगरसेवक की नियुक्ति महापौर/सत्तापक्ष द्वारा की जाएँगी,निश्चित ही बसपा नेता को विश्वास में लेकर किया जायेगा।इस सन्दर्भ में बसपा नेता मोहम्मद जमाल का कहना है कि उन्हें धोखे में रखकर उक्त अधिकार अथियाए गए है.

दूसरी ओर पक्ष नेता जमाल का कहना है कि आशीनगर ज़ोन सभापति चुनाव में दो परस्पर धुर विरोधी दल ने हाथ मिलाकर बसपा को हरा कर सभापति पद का चुनाव जीत लिया।कांग्रेस पक्ष नेता से बसपा ने समर्थन नहीं मांगी थी,उन्होंने खुद होकर समर्थन देने की बात कह हमें अँधेरे में रख येन वक़्त पर अपने उम्मीदवार का नाम वापिस न लेते हुए नगरसेवक संदीप सहारे को छोड़ उम्मीदवार सह शेष सभी नगरसेवकों ने भाजपा उम्मीदवार को मतदान कर उन्हें अल्पमत में होने के बावजूद सभापति पद तक पहुंचा दिया।जमाल ने यह भी बताया कि कांग्रेस पक्ष नेता ने आशीनगर ज़ोन में ढाई-ढाई साल के २ सभापति पद के लिए बसपा को समर्थन देने की बात कही थी और मंगळवारी ज़ोन में कांग्रेस के लिए आशीनगर ज़ोन की तर्ज पर बसपा से समर्थन माँगा था.


जमाल ने आगे बताया कि मंगळवारी ज़ोन सभापति चुनाव में येन वक़्त पर अपने उम्मीदवार का नाम वापिस लेने का कारण यह दर्शाया की,कांग्रेस ने आशीनगर ज़ोन सभापति चुंनाव में धोखा दिया और अगर मंगळवारी ज़ोन सभापति चुनाव में बसपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करते तो बाद में कांग्रेस एहसान जताती,जो कि हमें कतई स्वीकार नहीं होता।इसलिए इस संभावित षड्यंत्र से बचने के लिए बसपा ने येन वक़्त पर अपने उम्मीदवार का नाम वापिस लेकर भाजपा का सभापति बनने का मार्ग प्रसस्त कर दिया।जमाल के अनुसार वैसे भी नागपुर जिले में प्रस्थापित हो चुकी है,जिसका उदहारण है मनपा चुनाव में १० नगरसेवक चुनकर आये.बसपा पिछले कई वर्षो से बसपा न खुले तौर पर समर्थन लेती और न देती है.कोई खुद दे दे तो और बात है.इस हिसाब से जमाल की कथनी और करनी में काफी फर्क है.

बसपा नेताओं की उक्त दोनों चुनाव सह महापौर को दिए गए अधिकार पर शेष सभी नगरसेवक काफी नाराज़ है,उनका कहना है कि सत्तापक्ष के शह पर साल भर के लिए बने पक्ष नेता पद का भरपूर फायदा उठाया जा रहा है.इस मामले में अन्य नगरसेवकों को विश्वास में नहीं लिया जा रहा है.

उल्लेखनीय यह है कि पिछले २ दिन से मनपा की “आपली बस” पूर्णतः बंद रही,जनजीवन प्रभावित रहा,लेकिन इस ओर बसपा ने रत्तीभर जनहितार्थ कुछ भी नहीं किया।जब उन्हें जानकारी दी गई तो अनमने ढंग से टालमटोल जवाब दिया।

यह भी जानकारी बसपाइयों ने दी कि मनपा चुनाव में कांग्रेस को नेस्तनाभूत भाजपा ने बसपा का कन्धा का सहारा लिया।लेकिन उम्मीद के अनुरूप भाजपा की इच्छानुसार बसपा को “खिलाने” में बसपाइयों ने साथ नहीं दिया।भाजपा की उक्त योजना आगामी लोकसभा के लिए आंकी गई थी.