Published On : Thu, Apr 17th, 2014

चंद्रपुर: अरबों का कोयला घोटाला


हजारों
टन कोयला कालेबाजार में बेचा, 9 गिरफ्तार, तीन दिन की पुलिस रिमांड  

आरोपियों में लघु उद्योग विकास महामंडल के प्रबंधकीय निदेशक शामिल 

चंद्रपुर.
लघु उद्योगों को अल्प दरों पर मिलने वाले कोयले की कालाबाजारी कर करोड़ों रुपयों का घोटाला करने के मामले में आज चंद्रपुर की अपराध शाखा के एक दल ने चंद्रपुर और नागपुर में एक ही दिन एक साथ छापा मरकर साढ़े 10 हजार टन कोयले की रसीदों सहित कम्प्यूटर और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए. इस संबंध में महाराष्ट्र राज्य लघु उद्योग विकास महामंडल के प्रबंधकीय निदेशक सहित 9 लोगों पर मामला दर्ज कर सभी को गिरफ्तार किया गया. सभी आरोपियों को आज अदालत में पेश किया गया, जिन्हें अदालत ने तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.   आरोपियों में महामंडल के प्रबंधकीय निदेशक खटके, प्रबंधक खेबुडकर, उप प्रबंधक तन्नीरवार, नागपुर के विभागीय कार्यालय के व्यवस्थापक ईश्वर उगेमुगे, संजय अग्रवाल, अजय अग्रवाल, नवीन जयस्वाल व कलीम अब्दुल शेख शामिल हैं.

जिला पुलिस अधीक्षक राजीव जैन ने आज एक भीड़ भरी प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि पिछले महीने भर से जारी जांच में 121 टन कोयला अवैध रूप से बेचे जाने की बात सामने आई है.

नागपुर में छापा 

जैन ने बताया कि दुर्गापुर पुलिस स्टेशन में भास्कर सहारे की शिकायत के बाद अपराध शाखा ने इस मामले की जाँच शुरू की थी. इसके लिए पांच दल गठित किये गए थे. इसमें से तीन दलों ने नागपुर के संजय अग्रवाल, अजय अग्रवाल और नवीन जयस्वाल के स्वामित्व वाले श्रीरूप एजेंसी के कार्यालय में छापा मारा. इसी छापे में कोयला हैंडलिंग में अनियमितता की बात सामने आई. श्रीरूप एजेंसी के कार्यालय से 10 हजार 457 टन कोयले की फर्जी रसीदें, कम्प्यूटर, लोडिंग की रसीदें, डिलीवरी आदेश और कागजात जब्त कर मामला दर्ज किया गया.

ट्रक पकड़ा 

ठीक इसी समय चंद्रपुर से सटी पद्मापुर कोयला खदान से एम. एच. 34 ए. बी. 6994 क्रमांक के ट्रक से 17 टन कोयला ले जाते हुए ट्रक चालक को पकड़ा गया. उक्त कोयला निर्धारित लघु उद्योग में जाने की बजाय मोहन व्यंकटरमन रेड्डी की टाल पर खाली किया जाता था. इस मामले में ट्रक के चालक और मालिक अब्दुल करीम शेख और रेड्डी को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया.

पांच सालों से जारी था गोरखधंधा 

जैन ने बताया कि राज्य लघु उद्योग विकास महामंडल ने राज्य के करीब 850 उद्योगों को सब्सिडी पर कोयला की आपूर्ति करने का ठेका निजी एजेंसी को दिया था. उस एजेंसी द्वारा अनियमितताएं बरते जाने की शिकायत के बाद वर्ष 2012 में उसका ठेका रद्द कर दिया गया था. मगर उसके बाद नागपुर के संजय अग्रवाल-अजय अग्रवाल बंधुओं ने महामंडल के पास बिना 15 करोड़ की अमानत राशि जमा कराए और बिना किसी अनुमति के दिशान एग्रोटिक कंपनी के नाम पर फर्जी रसीदें बनाकर चंद्रपुर जिले की कोयला खदानों से कोयला उठाया और अरबों का घोटाला किया. यह गोरखधंधा पिछले चार से पांच सालों से चल रहा था.

File Pic

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