Published On : Wed, Jul 2nd, 2014

खामगांव : … तो आ सकती है दोबारा बुआई की नौबत


खामगांव तालुका में तीन हफ्ते से नहीं गिरी पानी की एक भी बूंद

खामगांव

खामगांव और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के तीन हफ्ते बीतने के बाद भी पानी की एक बूंद नहीं गिरी है. बुआई के योग्य बारिश नहीं आने से तालुका की 73 हजार 500 हेक्टेयर जमीन पर अब तक बुआई नहीं हुई है. केवल उन्हीं किसानों ने हिम्मत कर कपास की बुआई की है जिनके खेतों में पर्याप्त पानी है. खामगांव पंचायत समिति के कृषि अधिकारी अशोक पल्हाड़े के मुताबिक तालुका में ऐसी बुआई केवल साढ़े 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही हो पाई है.

नजरें टिकी आसमान पर
बारिश के दगा देने और तेज धूप के चलते कुओं का जलस्तर दिन ब दिन घटता जा रहा है. अगर और एक महीना बारिश नहीं आई तो कपास की फसल भी किसानों के हाथ से चली जाएगी और दोबारा बुआई की नौबत आ सकती है. गांवों में किसान अपने-अपने तरीके से भगवान को मनाने में लगे हैं और नजरें आसमान पर टिकी हुई हैं.

मूंग, उड़द की बुआई का समय गुजरा
पिछले साल जून माह में 2-3 बार मूसलाधार बारिश हो चुकी थी और किसान बुआई कर चुके थे. उसके बाद भी लगातार बारिश होती रही. बल्कि जुलाई माह में एक जैसी बारिश होने से सोयाबीन को नुकसान ही हुआ था और बाकी फसलें बेहतर रहीं थी. किसानों को लग रहा था कि पिछले साल जैसी ही इस साल भी बेहतर बारिश होगी. इसी के चलते मई माह में ही किसानों ने अपने खेतों को तैयार कर लिया था. मगर बारिश के इंतजार में पूरा एक महीना गुजर चुका है. मूंग और उड़द जैसी फसलों की बुआई का समय गुजर चुका है. बारिश कुछ और दिन ऐसे ही मुंह फेरे रही तो सोयाबीन की बुआई का वक्त भी निकल जाएगा.

किसान चिंतित, कृषि केंद्र मालिक भी परेशान
चिंता में सिर्फ किसान ही नहीं हैं, बल्कि कृषि केंद्रों के मालिक भी परेशान हैं. मौसम को देखते हुए उन्होंने भारी मात्रा में बीज और खाद जमा कर रखे थे, मगर बारिश नहीं होने से किसान दुकानों पर फटक भी नहीं रहे हैं. और कुछ दिन बारिश नहीं आई तो किसानों को अपनी सारी योजनाओं को बदलना पड़ेगा और इसके चलते बीजों की खरीदी के लिए भाग-दौड़ मच सकती है.

बांध भी होने लगे रीते
खामगांव तालुका में मन और तोरणा दो बड़े प्रकल्प हैं. आज की स्थिति में मन बांध में केवल 19. 50 प्रतिशत यानी 7. 18 मिलियन घनमीटर पानी बचा है. इस बांध के परिसर में 1 जून से आज तक केवल 20 मि. मी. बारिश ही हुई है. उधर, तोरणा बांध में 15.40 प्रतिशत यानी 1.21 मिलियन घनमीटर पानी का संग्रह बचा है. इस बांध परिसर में पहली जून से अब तक केवल 7 मि. मी. बारिश ही दर्ज की गई है.

ज्ञानगंगा तीन साल तक पिला सकता है खामगांव शहर को पानी
खामगांव, नांदुरा और खामगांव के एमआईडीसी क्षेत्र में जलापूर्ति करनेवाले ज्ञानगंगा बांध में आज की तारीख में 14.50 मिलियन घनमीटर पानी का संग्रह शेष है. अगर सिर्फ खामगांव शहर का विचार किया जाए तो यह तीन साल तक खामगांव शहर को पानी पिला सकता है. वैसे, हर साल खामगांव नगर परिषद 3.6 मिलियन घनमीटर पानी का आरक्षण करती है.

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