Published On : Tue, May 27th, 2014

आमगांव : किसान की फसल पर वनविभाग का बुलडोजर चला

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राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई किये जाने का आरोप


आमगांव

JCB in farm
आमगांव तहसील के ग्राम सावंगी में वर्ष 1970 से राजस्व विभाग की दो एकड़ जमीन पर अतिक्रमण कर खेती कर रहे किसान तिलकचंद भागचंद लिल्हारे के खेत में लगी धान की फसल को वन विभाग ने जेसीबी द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर नष्ट कर दिये जाने का मामला सामने आया है. लिल्हारे ने उक्त कार्रवाई को राजनीतिक दबाव के चलते किए जाने का आरोप लगाया गया है.

उल्लेखनीय है कि तिलकचंद लिल्हारे ने वर्ष 1970 में राजस्व विभाग की दो एकड़ जमीन पर अतिक्रमण कर खेती करनी शुरू की थी. जिसके लिए उसे 1992 में 200 रु. एवं वर्ष 2007 में 1000 रु.जुर्माना तहसील कार्यालय में भरना पड़ा था. गौरतलब है कि गांव में लगभग 18 एकड़. जमीन पर ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर पक्के मकान बना लिए है. एवं कइयों ने अतिक्रमण की जमीन पर खेती करनी भी प्रारंभ कर दी है. लेकिन बाद में राजस्व विभाग द्वारा यह जमीन वन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई. जिसके बाद वन विभाग ने अतिक्रमणकारियों से वनभूमि को खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी. वनविभाग की कार्रवाई के खिलाफ तिलकचंद लिल्हारे ने न्यायालय में मामला दर्ज कराया था. इस मामले की अगली सुनवाई न्यायालय में 19 जून 2014 को होने वाली है. लेकिन उससे पहले ही वन विभाग के अधिकारियों ने पुलिस की सहायता से अतिक्रमण हटाने के नाम पर उक्त किसान की दो एकड़ खेत में लगी धान की फसल बर्बाद कर दी है. जिससे उसका 60 से 70 हजार रु. का नुकसान हुआ है. जब कि 15 दिन बाद ही उक्त फसल की कटाईकी जानी थी. ऐसे में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर की जा रही कार्रवाई पर ग्रामीणों में आश्चर्य जताया जा रहा है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार 2 वर्ष पूर्व ग्राम में हुए ग्राम पंचायत के चुनाव में तिलकचंद लिल्हारे के परिवार ने दबंगोंके खिलाफ मतदान किया था. जिसके चलते उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था. उसी समय से उन्होंने लिल्हारे परिवार का बहिष्कार करना शुरू कर दिया था. बाद में वन अधिकार समिति एवं वन संरक्षण समिति के साथ मिलकर यह कार्रवाई की गई. यहां प्रश्न यह उठ रहा है कि जब 18 एकड़ भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है तो फिर तिलकचंद लिल्हारे की दो एकड़ जमीन के अतिक्रमण को ही हटाने में वनविभाग को इतनी जल्दी करने की क्या आवश्यकता थी. जबकि मात्र 15 दिन बाद ही धान की फसल की कटाई की जानी थी. कटाई के बाद अतिक्रमण अपने आप ही खत्म हो जाता एवं वनविभाग उक्त भूमि को अपने कब्जे में ले सकता था. यह भी पता चला है कि बुलडोजर से खेत में खड़ी फसल को नष्ट करते समय विरोध करने पर पुलिस द्वारा लिल्हारे परिवार के साथ दुव्र्यवहार भी किया गया.

दूसरी ओर वन विभाग के सहायक वन संरक्षक अश्विन ठक्कर का कहना है कि अतिक्रमणकारी द्वारा न्यायालय में जो आवेदन दाखिल किया गया था उसे रद्द कर दिया गया है एवं अतिक्रमणकारी द्वारा वन अधिकार समिति द्वारा उस पर लगाए गए जुर्माने को भी अदा नही किया गया है, जिसके कारण उस पर नियमानुसार ही कार्रवाई की गई है.

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