Published On : Thu, Jul 10th, 2014

साकोली : बारिश की बेरुखी से अकाल का साया


साकोली तहसील में धान की फसल बर्बादी की राह पर

संवाददाता / किशोर गडकरी

साकोली

sukha
मानसून के लापता होने से इस क्षेत्र में अकाल का साया मंडराने लगा है. इन दिनों तहसील में शत-प्रतिशत धान की बुआई की गई है, पर बारिश के अभाव में 70 प्रतिशत धान की नन्हीं कोंपलें सूख गई हैं.

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चुलबन में पानी कम
वैसे तो तहसील में चुलबन नदी पर चुलबन परियोजना बनाई गई है, परन्तु इसमें पर्याप्त पानी न होने की वजह से यहां के किसान बहुत परेशान हैं. हालांकि यहां तालाबों की भी संख्या बहुत है, पर सिंचाई व्यवस्था के अभाव में किसान इनका लाभ धान की खेती में नहीं ले पाते. तहसील में कुल 19 हजार 736 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती है, जिसमें से 12 हजार 451 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित है और 5 हजार 483 हेक्टेयर सूखी खेती है. 30 जून तक तहसील में 1 हजार 231 हेक्टेयर जमीन पर धान की बुआई की गई है. अलावा इसके 533 हेक्टेयर क्षेत्र में तुअर, 11 हेक्टेयर में तिल, 35 हेक्टेयर में सब्जी-भाजी और 784 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना की बुआई की गई है. परन्तु मानसून के मुंह फेर लेने से इस क्षेत्र में अकाल का साया मंडराने लगा है. तहसील में भीमलकसा धनोड़ परियोजना भी है, जो जनप्रतिनिधियों और शासन की उपेक्षा के चलते अधूरी पड़ी है.

किसानों में घबराहट, इंद्र देवता को मनाने में जुटे
मौसम विभाग की मानें तो 7 जून को मानसून का मृग नक्षत्र लगता है. यदि इस नक्षत्र में अच्छी बारिश हो तो धान का भरपूर उत्पादन होता है. 22 जून को लगने वाले आद्रा नक्षत्र व 6 जुलाई को लगने वाले पुर्नवसु नक्षत्र में धान रोपने का काम जोरों पर चलता है. बारिश नहीं होने से धान की फसल के बेकार जाने से किसान चिंतित हैं. आर्थिक नुकसान की संभावना बन गई है. बारिश का न होना अपने आप में एक भयंकर समस्या को जन्म दे रहा है. यद्यपि किसानों ने जैसे- तैसे कुएं से पानी लेकर धान की बुआई तो कर दी, परन्तु अब कुएं का पानी भी पाताल में जाने से आने वाले दिन न केवल किसानों, बल्कि आम जनता के लिए भी परेशानी का सबब बन सकते हैं. इससे किसानों में घबराहट का माहौल है. वे इंद्र देवता को मनाने के लिए भजन-पूजन में लगे हुए हैं.

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