7 वर्षों में चंद्रपुर जिले के 430 गांवों पुरस्कृत
चंद्रपुर
सरकार ने पिछले दिनों बड़े बाजे-गाजे के साथ टंटामुक्त समितियों की स्थापना की थी. इन समितियों के माध्यम से पिछले सात सालों में जिले के 430 गांवों को पुरस्कार के लिए चुना गया, लेकिन मजे की बात यह कि पुरस्कारप्राप्त गांवों में से केवल 325 गांवों को ही पुरस्कार दिया जा सका है. वर्ष 2012-13 में टंटामुक्त पुरस्कार स्पर्धा में चयनित 105 गांवों को अब तक पुरस्कार नहीं मिला है. इससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है. गांवों के विकास की दृष्टि से गृह मंत्री आर. आर. पाटिल द्वारा शुरू की गई इस योजना की तरफ़ से सरकार के गृह विभाग ने भी अब पीठ फेर ली है.
ग्रामीण निरुत्साहित
गृह मंत्री आर. आर. पाटिल ने वर्ष 2007 में महात्मा गांधी टंटामुक्त गांव समिति की घोषणा की थी. इसके पीछे उद्देश्य यह था कि गांव में होनेवाले विवाद गांव में ही निपटाए जाएं. गांव में होनेवाले पारिवारिक और सार्वजनिक विवादों के निपटारे के लिए ग्रामीणों का अदालत तक जाना औऱ उस पर होनेवाला खर्च तथा परेशानियों से ग्रामीणों को बचाना. इसके साथ ही योजना के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले गांवों को पुरस्कृत करने की नीति भी सरकार ने चलाई. सरकार की उत्कृष्ट योजना के कारण योजना को राज्य भर में पहले ही साल भारी प्रतिसाद मिला. लेकिन पिछले दो सालों से पुरस्कृत गांवों को पुरस्कार की राशि ही नहीं मिली. सरकार की उदासीनता के कारण इस अच्छी को योजना चलाने वाले ग्रामीण अब निरुत्साहित हो गए हैं.
गांव के विकास को मिली नई दिशा
राज्य ही नहीं, बल्कि विदर्भ में आदिवासी बहुल और नक्सलग्रस्त जिले के रूप में चंद्रपुर जिला सबसे आगे रहा है. टंटामुक्त समिति व ग्राम पंचायतों की पहल से शराब बिक्री पर लगाम कसी गई. इसी के कारण ग्राम स्तर पर स्वच्छ्ता अभियान, शतकोटि वृक्षारोपण योजना, स्वास्थ्य शिक्षा, महिला सशक्तिकरण आदि पर जनजागृति और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. अनेक विकासात्मक योजनाओं के क्रियान्वयन के कारण गांव के विकास को एक दिशा मिली. ग्रामस्तर पर होनेवाले झगड़ों और विवादों के निपटारे में टंटामुक्त समिति को सफलता मिली.
स्वमूल्यांकन प्रक्रिया 17 को
हर साल महाराष्ट्र दिन के मौके पर जिला प्रशासन की ओर से आवाहन किया जाता था कि चालू वर्ष में महात्मा गांधी टंटामुक्त अभियान में हिस्सा लेने के लिए संबंधित गांवों के टंटामुक्त पदाधिकारी स्वमूल्यांकन रिपोर्ट पेश करें. लेकिन इस दफा लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण स्वमूल्यांकन क़ी प्रक्रिया लंबित रखी गई. आगामी 17 मई को गांव में होनेवाली आम सभा में स्वमूल्यांकन किया जाएगा. 18 मई को रिपोर्ट पुलिस स्टेशन में सौंपी जाएगी. उसके बाद ये रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी.
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