Published On : Mon, Jun 9th, 2014

चंद्रपुर : कलेक्टर तथा सरकार के आदेश को ठेंगा

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बाढ रोकने नहीं किया उपाय वेकोलि ने

नदी-नालों को अवरुद्ध कर रहे ओवर बर्डन, बढा खतरा बाढ का

चंद्रपुर

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पिछले वर्ष लगातार 4 बार आई बाढ. तथा उससे हुए नुकसान का जायजा लेने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण स्वयं चंद्रपुर आए थे. उन्होंने उस समय बाढ. की स्थिति का जायजा लेने के बाद इसके लिए वेकोलि को भी जिम्मेदार बताया तथा नदी व नालों के किनारे रखे गए ओवर बर्डन हटाने का आदेशदिया था. इसके पश्‍चात समय-समय पर जिलाधिकारी ने भी नोटिस देकर वेकोलि अधिकारियों को चेताया. ओवर बर्डन हटाने व बाढ. न आने की दिशा में प्रयास करने का आदेश दिया, लेकिन वेकोलि ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. उनके आदेश को ठेंगा दिखाते हुए अपनी सुविधा के अनुसार काम किया. अब पुन: बरसात सिर पर है तो अधिकारियों के साथ नागरिकों को भी बाढ. की चिंता सताने लगी है.

5 जून को विश्‍व पर्यावरण दिवस के मौके पर शहर की पर्यावरणवादी संस्था ग्रीन प्लैनेट सोसाइटी के सदस्यों ने इस दिन शहर के खदान परिसर तथा अन्य स्थानों का दौरा कर जायजा लिया तो उनके ध्यान में यह बात आई कि मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष ही नदी-नाले के किनारे के ओवर बर्डन हटाने का आदेश दिया था. इसके बाद जिलाधिकारी व प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने वेकोलि अधिकारियों को दो पत्र लिखकर सुरक्षा दीवार बनाने को कहा था. इस बीच नीरी की टीम द्वारा ओवर बर्डन से बाढ. की स्थिति तथा प्रदूषण होने की रिपोर्ट दिए जाने पर प्रशासन ने पुन: नोटिस जारी करके ओबी के टीले 45 मीटर तक हटाने को कहा था. इस पर सिर्फ मुंगोली, बल्लारपुर व पद्मापुर में नदी का मलबा निकालकर टीलों को हटाने का थोडा-बहुत प्रयास किया गया, लेकिन चंद्रपुर में बाढ. का खतरा बढानेवाले माना खदान के टीले बिलकुल नहीं हटाए गए हैं और सुरक्षा दीवार भी नहीं बनाई गई है. सुरक्षा दीवार के नाम पर सीमेंट की बोरियों में मिट्टी डालकर उसे किनारे पर बिछाया गया है.

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चंद्रपुर शहर में पिछले वर्ष बाढ से जो तबाही मची, उससे कोई अनजान नहीं है. कई दिनों तक शहर का सारा कामकाज थम गया था. हजारों परिवार बेघर हुएथे. उनके घर का सारा सामान खराब हो गया था. सरकार को करोडो रुपए मुआवजे के रूप में देना पडा. उस कहर से कई परिवार आज भी संवर नहीं पाए हैं, लेकिन बाढ. न आने के लिए किए जानेवाले उपायों को लेकर वेकोलि के अधिकारियों को कोई चिंता नहीं है. वहीं सरकार व प्रशासन मात्र जुबानी व लिखित आदेश देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड रहा है. उसके आदेश का पालन न होने पर वह कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है.

इस वजह से उद्योगों के अधिकारी मनमानी करते रहते हैं और लोगों की जिंदगी को खतरे में डालते हैं. सरकारी व कलेक्टर के आदेश को तव्वजों न देनेवाले वेकोलि अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की जा रही है.

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