
न्यायमूर्ति सोनिया गोकानी के सामने इस याचिका पर सुनवाई इस साल तीन जुलाई को पूरी हुई थी.
दिवंगत पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटिजन फार जस्टिस एंड पीस’ ने दंगों के पीछे ‘बड़ी आपराधिक साजिश’ के आरोपों के संबंध में मोदी और अन्य को SIT द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के के खिलाफ आपराधिक पुनर्विचार याचिका दायर की थी.
याचिका में मांग की गई कि मोदी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं नौकरशाहों सहित 59 अन्य को साजिश में कथित रूप से शामिल होने के लिए आरोपी बनाया जाए. इसमें इस मामले की नए सिरे से जांच के लिए हाईकोर्ट के निर्देश की भी मांग की गई.
क्या है पूरा मामला?
साल 2013 के दिसंबर महीने में गुजरात दंगों के मामले में अहमदाबाद कोर्ट से नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट मिल गई थी. साल 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे. इन दंगों में करीब एक हजार से ज्यादा लोगों की जान गई थी. दंगों के वक्त मोदी मुख्यमंत्री थे. इस हमले में ही कांग्रेस नेता एहसान जाफरी मारे गए थे.
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