Published On : Wed, Sep 12th, 2018

कर्ज के बोझ से दबते जा रही मनपा

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नागपुर: सत्ताधारी भाजपा के कार्यकाल में मनपा वर्तमान में ८०० करोड़ के कर्ज पर जा पहुंची रही है. बावजूद इसके मनपा की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं है.अब तो आलम यह है कि विकास कार्य के लिए और कर्ज लेना अंतिम पर्याय शेष रह गया है.

ज्ञात हो कि मनपा पर पहले ही ६०० करोड़ से अधिक का कर्ज है. इसके बाद विगत माह २०० करोड़ का कर्ज लिया गया. मनपा की कुल आय का ५५% प्रशासकीय खर्च है. प्रशासकीय खर्च पर सालाना ९५० करोड़ का खर्च आता है, वहीं दूसरी ओर मनपा की आय का साधन सीमित है. मनपा प्रशासन के संपत्ति कर, बाजार विभाग, जल कर, नगर रचना,अग्निशमन विभाग पर मजबूत पकड़ नहीं होने के कारण उम्मीद के अनुरूप आय संकलन नहीं हो पा रहा है. ऐसी ख़स्ता हालत में वर्ष २०१८-१९ के बजट में घोषित महत्वकांक्षी प्रकल्प के लिए निधि जुटाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है.

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इसके अलावा मनपा को केंद्र के प्रकल्प स्मार्ट सिटी, मेट्रो रेल आदि के लिए भागीदारी देना अनिवार्य है. उक्त बिकट परिस्थिति से उबरने के लिए मनपा में सत्तापक्ष के नेतृत्वकर्ता व प्रशासन राज्य सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठा है.

मनपा को मासिक तय खर्चों में शहर बस सेवा को मासिक ६ से ७ करोड़ की भरपाई, ओसीडब्लू, कनक, साइबर टेक, प्राइवेट पीआर एजेंसी, वेतन,पेंशन के अलावा बैंकों के कर्ज का क़िस्त देना अनिवार्य है.

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वर्तमान आय की स्थिति देख मनपायुक्त ने खर्च पर नकेल कसना शुरू ही किया थी कि सत्तापक्ष ने अपने मनसूबों को पूरा करने के लिए विपक्ष के कंधों का इस्तेमाल कर प्रशासन पर निशाना साधा. प्रशासन इससे पहले की बात बिगड़ती, आनन-फानन में कुछ महत्वपूर्ण कोषों के तहत प्रस्ताव आमंत्रित करने का निर्देश जारी किया.

वहीं दूसरी ओर सत्तापक्ष के निर्देश पर उपमहापौर ने उनके अधिकार के २ करोड़ की निधि वितरण पर रोक लगा रखी है. महापौर के अधिकार की ५ करोड़ की निधि भी गुपचुप तरीके से अपने करीबियों में वितरित की जा रही. फ़िलहाल महापौर शहर को डेंगू आदि बीमारियों के बीच मुफ्त की सहल पर विदेश यात्रा पर चली गईं हैं. पक्ष-विपक्ष सभी का स्थाई समिति सभापति के कंधों पर भार पड़ रहा है. सत्तापक्ष में अंदरूनी कलह के कारण पदाधिकारियों को विपक्ष के हमले का शिकार होना पड़ रहा है. स्थाई समिति सभापति को फिर भी राज्य सरकार से विशेष अनुदान के साथ बढ़ा हुआ जीएसटी ( लगभग ९० करोड़ मासिक ) मिलने की आस है.

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