चिमुर: पुराने काल में बहुजन, आदिवासी समाज की स्थिति बहुत दयनीय थी। उस समय अज्ञानता के कारण समाज अंधश्रद्धा की बेड़ियों में जकड़ा हुआ समाज था। किसी भी मृत पशु का मांस खाने का प्रमाण लोगों में अधिक था। 
पिड़ित ( सफरर ) व्यक्ती – पिड़ित व्यक्ती को बहुत तकलीफ होती है। उस व्यक्ती के हाँथ पैर और शरीर के जोड़ दर्द देते है। भूख नहीं लगती, पेट में बायीं ओर दर्द होता रहता है ऐसी अनेक समस्याओं से मरीज़ जुझता रहता है। पिड़ित व्यक्ती को नियमीत दवाइयों का सेवन करना पड़ता है। और उन्हें जिंदगी भर दवाईयां शुरू रखनी पड़ती है।
वाहक ( कॅरिअर ) व्यक्ती – इसमें सर्व सामान्य व्यक्ती के खून में सिकलसेल होते है लेकिन उनका प्रमाण बहुत कम मात्रा में होता है उनको तकलीफ नहीं होती है। खून की जाँच करने के बाद भी वह व्यक्ती सिकलसेल बीमारी का वाहक है यह पता नहीं चलता। इस बीमारी की तकलीफ नहीं होने के बावजूद भी वाहक व्यक्ती से आनेवाली पीढी को सिकलसेल की बीमारी हो सकती है इसलिए उस व्यक्ती को वाहक कहा जाता है। अगर एक वाहक युवा की शादी वैसी ही वाहक युवती से होती है तो उन दोनों के सिकलसेल जीन्स उनके बच्चों में आ जाते है। इसलिए उनकी आनेवाली पीढी सिकलसेल बीमारी से ग्रस्त हो सकती है।
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