Published On : Wed, Aug 27th, 2014

आखिर किस चेले को उपकृत करेंगे भैयूजी महाराज

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दो चेलों की दावेदारी से महाराज पशोपेश में

नागपुर में शिवसेना के कोटे में टिकट सिर्फ एक, 5 ने ठोंका दावा

नागपुर टुडे

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मध्यप्रदेश के इंदौर निवासी आध्यात्मिक नेता श्री भैयूजी महाराज का महाराष्ट्र की राजनीति में अहम स्थान माना जाता है. अक्तूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में शिवसेना के कोटे में नागपुर से सिर्फ एक सीट है, लेकिन महाराज के दो अनुयायियों ने सेना की टिकट के लिए दावा ठोंका है. इसके लिए वे महाराज पर दबाव भी बनाए हुए हैं. इस दबाव ने महाराज को परेशान कर दिया है. उन्हें सूझ नहीं रहा है कि आखिर करें तो क्या करें. फ़िलहाल शिवसेना में आलम यह है कि टिकट के इच्छुकों में मूल शिवसैनिक तो एक ही है. जो हैं सो सौ टका कांग्रेसी हैं और कांग्रेस से ही शिवसेना में गए हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सेना की टिकट पाने में किसका जोर चलता है और महाराज किसे टिकट दिला पाते हैं.

दक्षिण नागपुर के लिए भी भाजपा का दबाव
विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र नागपुर शहर में शिवसेना को भाजपा ने 5 में से 1 सीट दी है. पहले पूर्व नागपुर था, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव से दक्षिण नागपुर शिवसेना के कोटे में है. हालांकि इस चुनाव में भाजपा इस सीट को हथियाने हेतु भी दबाव बनाए हुए है.

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महाराज ने दिया कुमेरिया को मैदान में उतरने का निर्देश
फ़िलहाल शिवसेना सुप्रीमो के निर्देशानुसार शिवसैनिक दक्षिण नागपुर में सक्रिय हैं. 5 इच्छुक शिवसेना की टिकट पाने हेतु अपने-अपने स्तर पर प्रयासरत हैं. खुद की मार्केटिंग भी कर रहे हैं. इनमें दो इच्छुक किशोर कुमेरिया और किशोर कन्हेरे श्री भैयूजी महाराज के चेले हैं. कुमेरिया तो महाराज के पुराने भक्त हैं और सेना के पुराने कार्यकर्ता भी. कुमेरिया को पिछले विधानसभा चुनाव में ऐन मौके पर महाराज ने टिकट दिलवाई थी. यह और बात है कि उन्हें विधानसभा पहुंचने में सफलता नहीं मिल पाई. हाल में हुए समझौते के तहत शिवसैनिक बने कन्हेरे ने भी अपने गुरु महाराज पर टिकट के लिए पुरजोर दबाव बनाया हुआ है. अब तक वे काफी मुद्रा भी खर्च कर चुके हैं. हालांकि महाराज के करीबियों का मानना है कि महाराज ने कुमेरिया को चुनाव मैदान में उतरने का निर्देश दे दिया है.

महाराज का प्रभाव कितना ?
अब सवाल यह है कि शिवसेना सुप्रीमो पर भैयूजी महाराज का कितना और कैसा प्रभाव है ? विगत लोकसभा चुनाव में महाराज ने अपने एक कांग्रेसी समर्थक को
शिवसेना की टिकट दिलाने का वादा किया था. इसके लिए महाराज 10-15 दिन मुंबई के एक आलीशान होटल में रुके भी थे, लेकिन शिवसेना ने उनके प्रस्ताव को सहमति नहीं दी थी. इस हिसाब से आगामी विधानसभा चुनाव में भैयूजी महाराज के शब्दों को कितना मान मिलेगा, महाराज समेत सभी इस बात को लेकर आशंकित है. और अगर मान मिल भी गया तो तरजीह किस मुद्दे को दी जाएगी, निष्ठावान शिवसैनिक या तगड़ा आसामी ?

सबके अपने-अपने सुर
दूसरी ओर शिवसेना के गोंदिया जिला संपर्क प्रमुख सतीश हरड़े यह प्रचारित करते हुए क्षेत्र में घूम रहे हैं कि सेना के दिग्गज नेताओं ने उन्हें काम से लगने का निर्देश दे दिया है. किरण पांडव के लिए एक पूर्व सांसद परिवार ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया हुआ है. शेखर सावरबांधे खुद को टिकट मिलने के पक्के आश्वासन का प्रचार कर मैदान में उतर चुके हैं. प्रमोद मानमोडे शिवसेना की सहयोगी विनायक मेटे की पार्टी की ओर से उम्मीदवारी पाने के लिए भिड़े हैं. उल्लेखनीय है कि, मानमोडे की इच्छाशक्ति को देखते हुए ही शिवसेना के लिए आर्थिक व्यवहार करने वाले पश्चिम नागपुर के एक अस्पताल संचालक ने अग्रिम राशि के रूप में उनसे चुनावी चंदा मांगा था.

सेना में प्रवेश हेतु दिया 6 करोड़
विगत माह राज्य के सत्ताधारी दल के एक ‘ब्लैक लिस्टेड कांट्रेक्टर कंपनी’ के मुखिया ने इंदौर के महाराज की मध्यस्थता में सेना में प्रवेश किया था. इसके बदले उन्हें 6 करोड़ से अधिक की राशि दान में देनी पड़ी थी. इन्हीं महाराज के भरोसे ये मुखिया दक्षिण नागपुर या काटोल विधानसभा सीट से सेना उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने हेतु पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. इसकी वजह साफ है. इन्हें लग रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में सत्तापलट हो सकता है और सत्तापलट हुआ तो खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होते ही सजा तो पक्की होगी ही. बस, इससे बचने के लिए उन्होंने सेना में प्रवेश किया है. सेना के सूत्र बताते हैं कि इस नेता का सेना में प्रवेश शहर के एक प्रभावशाली भाजपा नेता ने करवाया है. उसका कारण यह है कि इनके साथ किसी धंधे में भाजपा नेता की पार्टनरशिप भी है और अगर पार्टनर विधायक बन गया तो नहले पर दहला. अब सवाल यह है कि वे इस नए किशोर को कैसे टिकट दिलवाते हैं ? यह देखना काफी दिलचस्प होगा.

द्वारा:-राजीव रंजन कुशवाहा

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