“वेश्या-पत्रकारिता” के ये कलंक…!
जब हमें 'बाज़ारू पत्रकारिता' के विशेषण से नवाजा गया, हम शर्मसार हुए थे। हमें 'वेश्या'कहा गया, 'दलाल'कहा गया, तब भी हम शर्मसार हुए थे। लेकिन, आज हम गुस्से में हैं। आक्रोशित हैं। क्योंकि, 'शर्मगाह' में मुंह छुपाने एक इंच भी...
“वेश्या-पत्रकारिता” के ये कलंक…!
जब हमें 'बाज़ारू पत्रकारिता' के विशेषण से नवाजा गया, हम शर्मसार हुए थे। हमें 'वेश्या'कहा गया, 'दलाल'कहा गया, तब भी हम शर्मसार हुए थे। लेकिन, आज हम गुस्से में हैं। आक्रोशित हैं। क्योंकि, 'शर्मगाह' में मुंह छुपाने एक इंच भी...





