Published On : Thu, Jun 6th, 2019

गोंदियाः सटोरी चालाक, पुलिस बेबस

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क्रिकेट पर सट्टेबाजी एक कलंक का रूप धारण कर चुकी है

गोंदिया: इंडिया में क्रिकेट का जुनून खेल प्रेमियों के सिर चढ़कर बोलता है। वर्ल्डकप का आगाज हो चुका है और सटोरियों की दुकानें भी हर शहर में सज चुकी है।

बात अगर गोंदिया की कि, जाए तो यहां क्रिकेट पर सट्टेबाजी एक कलंक का रूप धारण कर चुकी है।

बड़े बुक्कियों पर किसी भी प्रकार की छापामार कार्रवाई का न होना, यह अपने आप में बताने के लिए काफी है कि, सटोरी कितने चालाक और पुलिस कितनी बेबस है?

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हां.. अलबता इतना जरूर है कि, मीडिया में खबरें आने के बाद लगवाड़ी और खायवाली में सक्रिय 2 दर्जन बुक़िज, पुलिस द्वारा शो-रेड का मैसेज मिलते ही अपने गुर्गो को आगे कर देते है और पुलिस इन बुक्कियों के अड्डों पर खाना और नाश्ता पहुंचाने वाले उनके चेले-चपाटों पर मामला दर्ज करते हुए मीडिया और पब्लिक को गुमराह करने के प्रयास में जुट जाती है तथा यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि, पुलिस बहुत एक्टिव है? और उन्होंने बुक्कियों को पकड़ा है? दरअसल यह बुक्की नहीं होते, उनके गुर्गे होते है?

पुलिस जिनके सरपरस्ती में यह क्रिकेट सट्टेबाजी का सिडिंकेट चलने की बात कहती है, उनमें से किसी भी बड़े बुक्की की अब तक गोंदिया में न तो गिरफ्तारी की गई है और ना ही कोर्ट से उनका पीसीआर हासिल करने की जहमत ही पुलिस ने दिखायी है। अब आप समझ गए होंगे पुलिस और बुक्कियों का यह आपसी गठजोड़ कितना नायाब हो चला है?

गोंदिया में क्रिकेट का सट्टा पुलिस के संरक्षण में चल रहा है? यह कहने में भी अब कोई अतिश्योक्ति नहीं? क्योंकि पकड़े गए गुर्गों की जमानत भी चट मंगनी.. पट ब्याह के तर्ज पर थाने से तुरंत कर दी जाती है।

कैसे काम करता है सट्टेबाजों का नेटवर्क?
सट्टे का काला कारोबार जुबान पर चलता है, लिहाजा पुलिस छापे के वक्तकोई बड़ी नकद राशि बरामद नहीं होती? लेकिन सटोरियों की जान उस लैपटॉप-कम्प्यूटर के हार्ड डिस्क और वाईस रिकार्डर से लैस सुटकेस अर्थात डिब्बे में अटकी होती है, जिसके माध्यम से यह बुक्की हॉट लाईन लेकर बॉल दर बॉल भाव खोलते है तथा लगवाड़ी करनेवाले फंटर और खायवाली करनेवाले बुकी की आवाज और सौदे की तय रकम सबूत के रूप में वाईस रिकार्डर में दर्ज होती है। सूत्रों की मानें तो घटनास्थल से ना सिर्फ सौदे लिखा हुआ काला चिठ्ठा, पाना अर्थात रजिस्टर बरामद होता है अलबता दर्जनों मोबाइल से जुड़ा हुआ डिब्बा जिसे बुक्कियों की भाषा में सुटकेस कहते है, वह भी अड्डे से पुलिस के हाथ लगता है लेकिन पुलिस पलक झपकते ही केस को मजबूत से सुस्त कैसे बना देती है? इसकी एक बानगी शहर के सिविल लाइन में आईपीएल मैच के दौरान सामने आयी। एैसी जनचर्चा बनी हुई है कि, केस का रूख बदलने के लिए तथा भविष्य में अदालती कार्रवाई (सजा) से बचाने हेतु पुलिस ने पकड़े गए एक बुक्की और उसके 6 गुर्गो की मदद की।

पुलिस अगर पुरी इमानदारी के साथ रेड के दौरान जब्त किया गया साहित्य कोर्ट में पेश कर दें और अदालत के समक्ष सारे तथ्य रखें तो पुलिस ना सिर्फ एैसे बड़े बुक्कियों का पीसीआर हासिल कर सकती है, बल्कि महानगरों में बैठे कई बड़े बुक्कियों का चेहरा भी बेनकाब किया जा सकता है?

विशेष उल्लेखनीय है कि, आईपीएल के दौरान हुई छापामार कार्रवाई में नागपुर तथा कामठी निवासी 3 बड़े बुक्कियों के नाम सामने आए लेकिन मामला हवा-हवाई हो गया।

वर्ल्ड कप का आगा़ज, जमकर हो रही खायवाली
क्रिकेट विश्‍वकप का आगाज 30 मई से हो चुका है, जबकि इसका फाईनल मैच 14 जुलाई को खेला जायेगा। वेस्टइंडी़ज, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत ये 4 टीमें सेमी फाइनल में पहुंचेगी? इस पर सबसे ज्यादा सट्टा खेला जा रहा है। इस बार ऑल राऊंडरों से भरी वेस्टइंडी़ज सट्टोरियों की फेवरेट लिस्ट में है।

5 जून को भारत ने वर्ल्डकप महाकुंभ के आगाज के साथ अपना पहला मुकाबला दक्षिण अफ्रिका से खेला जिसमें भारत को जीत मिली। इस मैच पर करोड़ों का सट्टा लगा।

आईपीएल की तर्ज पर ही फैंसी क्रिकेट के सौदे में सबसे अधिक बुकी माल कमा रहे है। मैच के टॉस से लेकर, पहले सेशन से आखिरी सेशन तक पन्टरों को जाल में फांसने हेतु ललचाई भाव खोले जाते है।

मैच के हर बॉल पर सट्टा खेला जा रहा है, जिसमें छक्का लगेगा या चौका? विकेट किस रूप में गिरेगा? फ्री-हिट मिलेगा क्या? मैडन ओवर रहेगा क्या? ओवर में कुल कितने विकेट गिरेंगे? कितने रन बनेंगे? मैच के दौरान बारिश होगी या नहीं? एैसे सारे सौदो को क्रिकेट की भाषा में फैंसी सट्टा कहते है, जिसपर सबसे ज्यादा बुक्कियों द्वारा खायवाली की जा रही है और पन्टरों को कंगाल बनाया जा रहा है।

– रवि आर्य

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