Published On : Tue, Sep 24th, 2019

दबाव के बाद कई स्कूलों में कामचलाऊ PTA

Advertisement

RTE, Nagpur

नागपुर: सभी को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) एक्ट के अंतर्गत सभी स्कूलों में पालक शिक्षक एसोसिएशन (पीटीए) का गठन अनिवार्य किया गया है. साथ ही कमेटी को अनेक तरह के अधिकार भी दिये गये हैं. लेकिन कई स्कूलों में इस तरह की कमेटी केवल कागजों पर बनाई गई है. इसमें पालकों की हिस्सेदारी भी कम ही रखी गई है. केवल के स्कूल के हितों का समर्थन करने वाले पालकों को ही इसमें जगह दी गई है, न ही पालकों के बीच चुनाव कराए गए और न ही नियमानुसार प्रक्रिया की गई है.

राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना २१/3/२०१४ के अनुसार निजी व अनुदानित स्कूलों में पीटीए की स्थापना अनिवार्य की गई है. इसके तहत शहरी पालकों को 50 रुपये और ग्रामीण पालकों को २० रुपये भरकर पीटीए की सदस्यता ग्रहण करना है. इसके बाद सभी सदस्यों का चयन होगा. पीटीए में एक अध्यापक अध्यक्ष, एक पालक उपाध्यक्ष, सचिव सीनियर टीचर, दो सह-सचिव पालक सदस्य, एक पालक तथा एक क्लास टीचर सभी वर्ग का एक प्रतिनिधि और 50 फीसदी महिलाओं का होना अनिवार्य है.

Gold Rate
28 Jan 2026
Gold 24 KT ₹ 1,64,400/-
Gold 22 KT ₹ 1,52,900 /-
Silver/Kg ₹ 3,72,000 /-
Platinum ₹ 60,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

– स्कूलों के विकास में पालकों का सहभाग
पीटीए के माध्यम से को-कर्रिकुलम एक्टीविटी, सिलेबस, विकास योजना और सिलेबस का निरीक्षण सहित अनेक कार्य किये जाते हैं. साथ ही हर तीन माह में बैठक लेना अनिवार्य और उसकी जानकारी नोटिस के द्वारा सदस्यों को देना पड़ता है. 15 प्रश फ़ीस बढ़ाने के पूर्व सभा में स्कूल की बैलेंसशीट, मुफ़्त शिक्षा के अधिकार अंतर्गत प्रवेश प्राप्त विद्यार्थियों की सूची तथा नॉनटीचिंग स्टाफ और टीचिंग स्टाफ की सूची रिसिप्ट पेमेंट रजिस्टर आदि का समावेश है और प्रत्येक दस्तावेजों में पालक समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य किया गया है. इसके बाद ही स्कूलों में फीस बढ़ाई जा सकती है.

– सरकार की सख्ती पर भी निकाला रास्ता
सिटी में पिछले दिनों से आरटीई एक्शन कमेटी और पालक जागृति समिति द्वारा फीस वृद्धि के खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है. इसके बाद अनेक स्कूलों में पीटीए का गठन किया गया, लेकिन इसमें उन पालकों को शामिल किया गया है जो स्कूल के फेवर में हैं.

कुछ जगह पर उन पालकों को समाविष्ट किया गया है जो न ही कभी बैठकों में शामिल होते है और न ही उन्हें नियमों को जानकारी है. यानी स्कूलों ने सरकार की सख्ती पर भी रास्ता निकाल लिया है. इस संबंध में शिक्षा विभाग की भूमिका बेहद लापरवाहीपूर्ण रही है. शिकायतों के बाद भी स्कूलों में न ही निरीक्षण किया जाता है और न ही जानकारी मांगी जाती है. यही वजह है कि कुछ निजी स्कूलों में मनमानी का दौर जारी है.

GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Advertisement
Advertisement