
नागपुर: शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित तीन गोरखनाथ मंदिरों की जमीन और संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया है। नाथजोगी समाज ने मंदिरों की जमीन पर कथित कब्जे, प्राचीन मूर्तियों को हटाने और मंदिरों के मूल स्वरूप में बदलाव किए जाने के आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
महाराष्ट्रीय संपूर्ण नाग जोगी समाज सुधार संस्था के सलाहकार योगी शंकरनाथ जाधव ने सोमवार, 13 अक्टूबर को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने जागनाथ बुधवारी स्थित महायोगी गोरखनाथ मंदिर के अलावा रामटेक और लकड़गंज के मंदिरों की संपत्तियों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए।
1909 में मंदिर के लिए दान की गई जमीन पर विवाद
जाधव के अनुसार, जागनाथ बुधवारी स्थित गोरखनाथ मंदिर के लिए वर्ष 1909 में पंजीकृत दानपत्र के माध्यम से लगभग 2,700 वर्ग फुट जमीन दान की गई थी। उनका दावा है कि जमीन का इस्तेमाल केवल मंदिर के उद्देश्य से किया जाना था, लेकिन संबंधित दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर उस पर निजी कब्जा हासिल करने का प्रयास किया गया।
इस मामले में उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी अमोल ठाकरे पर भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब उपलब्ध नहीं हो सका है।
जाधव ने आरोप लगाया कि मंदिर में स्थापित महायोगी गोरखनाथ, साईंबाबा और भगवान दत्तात्रेय की मूल मूर्तियों को उनके स्थान से हटा दिया गया। उनके अनुसार, पुराने तहखाने और प्राचीन निर्माण को भी तोड़ा गया, जिससे मंदिर का मूल स्वरूप बदल गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि समाज के विरोध के बाद दूसरी मूर्तियां लाकर उन्हें महंतों की समाधियों पर स्थापित किया गया। मंदिर के प्रवेश द्वार पर टिनशेड और लोहे का गेट लगाए जाने से पारंपरिक पूजा-अर्चना में बाधा आने का आरोप भी लगाया गया।
रामटेक की 55 एकड़ जमीन और लकड़गंज मंदिर पर भी सवाल
नाथजोगी समाज ने रामटेक स्थित आदिनाथ गोरखनाथ मंदिर की लगभग 55 एकड़ जमीन के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। जाधव का आरोप है कि इस जमीन के कुछ हिस्सों का उपयोग होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
इसी तरह, लकड़गंज स्थित विमलेश्वर गोरखनाथ मंदिर की लगभग 15,000 वर्ग फुट जमीन पर दुकानें बनाए जाने और धार्मिक संपत्ति का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है।
समाज ने तीनों मंदिरों के भूमि रिकॉर्ड, वास्तविक कब्जे, निर्माण अनुमतियों, कथित अतिक्रमण और प्रबंधन व्यवस्था की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
जाधव ने यह आरोप भी लगाया कि योगी आदित्यनाथ और उनसे संबंधित धार्मिक संस्था के नाम का कथित तौर पर दुरुपयोग कर लोगों को गुमराह किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री से शिकायत, आंदोलन की चेतावनी
जाधव के मुताबिक, नाथजोगी समाज पिछले करीब दो दशकों से मंदिरों की संपत्तियों के संरक्षण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि धर्मादाय आयुक्त के समक्ष लगातार प्रयास करने के बावजूद समाज को न्याय नहीं मिला है।
अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर तीनों मंदिरों की संपत्तियों की जांच कराने की मांग की जाएगी। साथ ही, विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की गई है।
जाधव ने कहा कि 22 अक्टूबर को गोरखनाथ प्रकट दिवस है। उन्होंने सरकार से उससे पहले हस्तक्षेप कर मामले की जांच कराने और समाज की मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से तीव्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोरखनाथ मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष मनीष पुंड, सचिव पुरुषोत्तम कोकाटे, कोषाध्यक्ष साहिल जाधव और समाज के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।



