
नागपुर: उच्च शिक्षा के लिए शहर आने वाली अल्पसंख्यक छात्राओं के लिए प्रस्तावित हॉस्टल परियोजना अब भी अधर में लटकी हुई है। साल 2016 से शुरू यह योजना कई बार मंजूरी और फंड मिलने के बावजूद जमीन पर नहीं उतर पाई है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, इस हॉस्टल के लिए 2016 में करीब 4.78 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। बाद में 2021 में परियोजना का विस्तार करते हुए 200 छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने का निर्णय लिया गया और संशोधित बजट के तहत करीब 16 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।
दो बार मंजूरी, बढ़ा हुआ बजट और 2023 में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे साफ है कि मामला सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।
प्रशासन की ओर से जमीन उपलब्ध न होने को देरी का कारण बताया जा रहा है, लेकिन इतने सालों बाद भी कोई ठोस प्रगति न होना सीधे तौर पर कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
इस मुद्दे पर महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार ने फंड उपलब्ध कराया, लेकिन अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ रहा। इससे सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तुरंत कार्रवाई कर समाधान निकालने की मांग की है।
वहीं, नागपुर में पढ़ाई के लिए आने वाली अल्पसंख्यक छात्राओं और उनके अभिभावकों का कहना है कि सुरक्षित और किफायती आवास की सुविधा मिलना बेहद जरूरी है, लेकिन वर्षों से इस दिशा में सिर्फ घोषणाएं ही हो रही हैं, जमीनी काम नहीं।








