Published On : Sat, Apr 25th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

जाति सेंसस की ‘जंग’ में आर-पार ” हाउस काउंटिंग ” में OBC का कॉलम गायब होने से बवाल

1931 के बाद पहली बार जाति गिनती लेकिन पहले घर , फिर जाति... OBC नाराज़ , बहिष्कार की चेतावनी
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गोंदिया। देश में होने वाले दूसरे चरण की जनगणना से पहले ही विरोध के सुर तेज हो गए हैं। ओबीसी संघर्ष कृति समिति गोंदिया और सकल ओबीसी समिति ने हुंकार भरते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अगर हाउस काउंटिंग में ओबीसी (OBC) के लिए अलग जाति का कॉलम नहीं रखा गया, तो ओबीसी समुदाय जनगणना का पूर्ण बहिष्कार करेगा।
शुक्रवार 24 अप्रैल को आयोजित एक पत्र परिषद में समिति ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप

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समिति ने याद दिलाया कि 25 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार ने ओबीसी की अलग से जनगणना कराने का वादा किया था। केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने भी सार्वजनिक मंचों से इसका वादा किया था। यहां तक कि संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में भी जातिगत जनगणना का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन अब धरातल पर तस्वीर इसके उलट दिख रही है , सरकार की कथनी और करनी में फर्क दिखाई देता है।


घरेलू गणना फार्म में SC/ST का जिक्र तो ओबीसी से परहेज क्यों ?

समिति के अध्यक्ष बबलू कटरे ने सरकार की नीति पर प्रहार करते हुए तीखे सवाल रखते कहा “जब घरों की सारी जानकारी पहले से ही ग्राम पंचायतों और नगर परिषदों के पास है, तो दोबारा उसकी गिनती का नाटक क्यों ? सबसे बड़ा सवाल यह है कि घरेलू जनगणना के फॉर्म में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का जिक्र है, लेकिन ओबीसी का कॉलम गायब है। क्या सरकार हमें (ओबीसी ) को गिनती से बाहर रखना चाहती है?
यह अस्तित्व की लड़ाई है – हाउस सेंसेक्स फार्म से ओबीसी कैटेगरी को बाहर रखना यह संकेत देता है कि मुख्य जनगणना में भी ओबीसी का अलग डेटा नहीं लिया जाएगा।
यह डेटा का दोहरा मापदंड है एक तरफ सरकार एससी/एसटी का डेटा ले रही है, लेकिन ओबीसी को ‘अदृश्य’ बनाए रखना चाहती है।
समिति का कहना है कि जब तक हाउस सेंसेक्स प्रपत्र में ओबीसी के लिए अलग से खाना ( कॉलम ) सुनिश्चित नहीं होता, तब तक बहिष्कार जारी रहेगा।

शक्ति प्रदर्शन: मैदान में उतरे दिग्गज

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओबीसी समाज की एकजुटता साफ दिखी। इस दौरान संगठन के अध्यक्ष बबलू कटरे के साथ मुख्य रूप से अमर वराड़े, मनोज मेंढे , सुनील पटले, खेमेन्द्र कटरे, कैलाश भेलावे, राजेश चांदेवार, सुनील भोंगड़े, धनंजय वैध, वाय. टी. कटरे, कैलाश टेंभरे, राजीव ठकरेले, महादेव तरोने, राजेश गिरिपुंजे, जितेंद्र कटरे और प्रदीप रोकड़े समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
बहरहाल समिति के इस कड़े रुख ने अब गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। यदि समय रहते कॉलम नहीं जोड़ा गया, तो आने वाले दिनों में यह विरोध एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।

रवि आर्य

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