
गोंदिया | महाराष्ट्र बोर्ड की दसवीं की परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। जिले की सालेकसा तहसील के जिला परिषद हाईस्कूल कावराबांध में ‘मुन्नाभाई MBBBS’ की तर्ज पर दूसरों की जगह परीक्षा पेपर लिख रहे तीन फर्जी छात्रों को उड़नदस्ते ने धर दबोचा , अब इस गंभीर लापरवाही और मिलीभगत पर जिला प्रशासन ने कड़ा प्रहार करते हुए स्कूल के मुख्याध्यापक और केंद्र संचालक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
विज्ञान के पेपर में ‘नकल माफिया’ का फॉर्मूला फेल
घटना 13 मार्च की है, जब दसवीं बोर्ड के विज्ञान-2 (Science-2) का पेपर चल रहा था। परीक्षा केंद्र क्रमांक 2177 (कावराबांध) में जब जांच दल ने आकस्मिक निरीक्षण किया, तो अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। तीन अलग-अलग कमरों में ऐसे छात्र बैठे थे जिनका चेहरा रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था।
कमरा नंबर 02: रोल नंबर J-148989 पर फर्जी छात्र मिला , कमरा नंबर 17: रोल नंबर J-149013 पर फर्जी छात्र पाया गया और कमरा नंबर 23: रोल नंबर J-148971 पर फर्जी छात्र पर्चा छुड़ाते
रंगेहाथों पकड़ा गया।
मध्यप्रदेश से बुलाए गए थे ‘सॉल्वर’ तीनों फर्जी छात्र
परीक्षा हॉल से पर्चा छुड़ाते पकड़े गए तीनों छात्र महाराष्ट्र के नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के , लांजी तहसील के (ग्राम कारंजा) के रहने वाले हैं। पूछताछ में जब ये छात्र संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं। जांच में साफ हुआ कि ये ‘बोगस’ छात्र असली परीक्षार्थियों की जगह पेपर हल करने के लिए बुलाए गए थे।
CEO का ‘हंटर’: दो सस्पेंड, बाकियों पर भी गिरेगी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एम. मुरूगानंथम ने तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट में नियमों के घोर उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद, 28 मार्च को बड़ी कार्रवाई की करते हुए मुख्य अध्यापक हरीशचंद्र पी. दराडे तथा परीक्षा केंद्र संचालक आनंदराव एस. कोरे को निलंबित कर दिया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक यह मामला ‘महाराष्ट्र जिला परिषद सेवा (आचरण) नियम’ के तहत गंभीर कदाचार है। परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा अन्य संलिप्त कर्मचारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
बहरहाल इस प्रकरण के सामने आने के बाद सिस्टम पर बड़ा सवाल यही उठ रहा है आखिर मध्यप्रदेश के छात्र सीमा पार कर परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंचे? क्या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है? फिलहाल, शिक्षा विभाग इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या इससे पहले के पेपरों में भी यही बोगस छात्र बैठे थे।
रवि आर्य









