
राजभवन के 80 से अधिक कर्मचारियों के हस्ताक्षर वाली चिट्ठी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजी गई थी जिसमें उनके ख़िलाफ़ गंभीर शिकायतें की गई थीं, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया। पत्र में कहा गया था कि उन्होंने “राजभवन को ‘लेडीज़ क्लब’ में बदल दिया था जहाँ सिर्फ़ युवा महिला कर्मचारियों की ‘नाइट ड्यूटी’ लगाई जाती थी।
मेघालय के राज्यपाल वी षणमुगनाथन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को तमिलनाडु में मज़बूत बनाने में लगाया। परंपरागत तौर पर दक्षिण भारत में संघ की उतनी पैठ नहीं रही है जितनी उत्तर और पश्चिमी भारत में, इस लिहाज से षणमुगनाथन का काम काफ़ी कठिन था, उन्होंने 45 साल से अधिक समय संघ को गाँव-गाँव में पहुँचाने में लगाया। तमिलनाडु में आरएसएस का वरिष्ठतम प्रचारक के होने की वजह से ही उन्हें मोदी सरकार ने राज्यपाल बनाया था। 68 वर्षीय षणमुगनाथन मेघायल के अलावा अरुणाचल प्रदेश के भी कार्यवाहक राज्यपाल थे।
किसी ज़माने में भाजपा के अध्यक्ष रहे जना कृष्णमूर्ति के बाद तमिलनाडु से आने वाले वे संघ के गिने-चुने बड़े प्रचारकों में थे, 1962 में संघ से जुड़ने के बाद वे 1970 में संघ के प्रचारक बने और दो साल तक संघ के प्रांत प्रचारक (राज्य में संघ के सबसे बड़े नेता) भी रहे। तमिलनाडु के तंजावुर ज़िले से ताल्लुक रखने वाले षणमुगनाथन ने संघ को स्थापित करने के लिए कई अभियान चलाए जिनमें युवाओं को जोड़ने का अभियान प्रमुख था। राजनीति शास्त्र में एम फ़िल कर चुके षणमुगनाथन भाजपा के दिल्ली स्थित मुख्यालय में रिसर्च एंड डॉक्युमेंटेशन के प्रभारी के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रवाद और हिंदू संस्कृति की महानता पर तमिल में तीन किताबें भी लिखी हैं।
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