Published On : Fri, Jul 11th, 2014

सावनेर : साल-दो साल में नया ड्रेस, कीमत भी अनाप-शनाप


निजी स्कूलों के इस फंडे से परेशान हैं अभिभावक


खुलेआम हो रही इस लूट को रोकने की मांग


सावनेर

न सिर्फ सावनेर बल्कि विदर्भ में लगभग सभी स्थानों पर निजी स्कूलों में ड्रेस कोड के चलते साल-दो साल में गणवेश बदल दिए जाते हैं और इन्हें स्कूलों से ही खरीदना पड़ता है. इससे अभिभावकों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है. इससे ड्रेस मटेरियल और कॉपी-किताबों की दुकानों पर संकट आया हुआ है.

निजी अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों का बढ़ता चलन
आजकल अभिभावक अपने बच्चों को नगरपालिका, जिला परिषद और अन्य सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के बजाय निजी और अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में पढ़ाते हैं. स्कूल वाले भी इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं और अभिभावकों को करीब-करीब लूट रहे हैं. अभिभावकों से शर्ट, पैंट, बैग, टाई, पट्टा, जूते-मोजे और किताबे-कॉपियों के लिए अनाप-शनाप कीमत वसूली जाती है.

Advertisement

कहीं विद्यार्थियों का टोटा, कहीं लंबी कतारें
एक तरफ नामी मराठी और हिंदी माध्यम के सरकारी और सरकारी मान्यताप्राप्त स्कूलों में विद्यार्थियों का टोटा लगा रहता है. गली-मोहल्लों की खाक छानने के बाद भी शिक्षकों को विद्यार्थी नहीं मिलते. इन स्कूलों में ड्रेस, कॉपी-किताबें और मध्यान्ह भोजन तक नि:शुल्क दिया जाता है. जबकि निजी स्कूलों में महंगी फीस वसूली जाती है और अनेक स्थानों में तो भारी भरकम डोनेशन भी लिया जाता है. इसके बावजूद यहां विद्यार्थियों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहती हैं.

Advertisement

महंगा ड्रेस, महंगी किताबें
सावनेर शहर और तालुका के अनेक स्कूलों के संचालक नर्सरी से पहली कक्षा, पहली से चौथी कक्षा, पांचवी से सातवीं और आठवीं से दसवीं कक्षा के बच्चों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड रखते हैं और हर तीन साल में ड्रेस बदल दिए जाते हैं. इसका खामियाजा अभिभावकों को भुगतना पड़ता है, जबकि संचालक वर्ग की दसों उंगलियां घी में डूबी होती हैं. खुले बाजार की तुलना में काफी महंगी दरों पर इन स्कूलों में ड्रेस और कॉपी-किताबें बेची जाती हैं और अभिभावकों को मजबूरी में स्कूलों से ही खरीददारी करती पड़ती है. इस लूट को रोका जाना चाहिए. लेकिन सवाल यह है कि पहल कौन करेगा ?

Advertisement
File pic

File pic

Advertisement

Advertisement
Advertisement
 

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement