Published On : Tue, Apr 22nd, 2014

सालेकसा: १३ साल से सालेकसा तालुका वासी कर रहे मुख्यालय बस स्टैंड का इंतज़ार

सालेकसा.

१ मई १९८१ को अस्तित्व में आया सालेकसा तालुका आगामी १ मई २०१३ को ३३ वर्ष का हो जाएगा । सालेकसा तालुका आमगांव निर्वाचन क्षेत्र में है और भंडारा गोंदिया साथ ही अब गडचिरोली, चिमूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में इस तालुके का समावेश है। लेकिन अबतक इस तालुके में बस स्टैंड नहीं बन पाया है। लोगों में प्रशासन के प्रति काफी रोष है। तालुके में बस स्टैंड नहीं होने के कारण दूर दूर के गांवों से आने वाले यात्रियों को कड़ी धुप में बस का इंतज़ार करना पड़ता है। बच्चे हो, बड़े हो या बूढ़े वो सब चिलचिलाती गर्मी में खड़े रहकर बस का इंतज़ार करने को मजबूर है।

जब यात्रियों से बात की गई तो लोगों ने राजनेताओं के प्रति अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए कहा की प्रशासन को आम लोगों की कोई फिक्र नहीं है । अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने के लिए बस लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है । लोगों ने आरोप लगाया की चुनाव के वक्त विकास की बड़ी बड़ी बातें करने वाले नेता आम जनता के हितों के लिए कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाते। जनता की समस्या जस की तस की स्थिति में रहती है लेकिन ये नेता उनकी समस्याओं का निवारण करने के लिए कुछ नहीं करते ।

बस स्टैंड पर इंतज़ार करती कुछ आदिवासी महिलाओं से जब बात की गई तो उन महिलाओं ने सरकार की सुविधाओं और योजनाओ के बारे में खुदको अनजान बताते हुए कहा की हम लोगों तक तो सरकार की सुविधाएँ पहुँचती ही नहीं।

महाराष्ट्र के पूर्वी कोने पर स्थित सालेकसा तालुका के पूर्व में छत्तीसगढ़ तो उत्तर में मध्य प्रदेश राज्य की सीमा है। इन सीमा क्षेत्रों में आदिवासी लोग ज्यादा संख्या में है। आर्थिक रूप से कमज़ोर होने के कारण इन लोगों के लिए अपने प्राइवेट वाहन रखना मुमकिन नहीं है और सफर के लिए एस. टी और टैक्सी का इस्तेमाल करने के अलावा इनके पास और कोई पर्याय नहीं है। मुख्यालय में किसी कार्यालयीन काम या खरीदारी करने के लिए आने के बाद वापसी में इन्हे एस. टी की राह देखनी पड़ती है। लेकिन बस स्टैंड नहीं होने के कारण इन्हे रास्ते पर ही धुप में खड़े होकर या बैठकर बस की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसके अलावा सालेकसा के लोग भी शहर या दूसरे गांवों में जाने के लिए एस. टी बस का ही इस्तेमाल करते है। विद्यार्थी भी आने जाने के लिए एस. टी बस का ही इस्तेमाल करते हैं और रास्ते के किनारे खड़े होकर बस का इंतज़ार करने को मजबूर है।

बस स्टैंड नहीं होने से यहाँ शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है जिससे महिला यात्रियों को काफी परेशानी होती है।बस स्टैंड हीं होने की वजह से गर्मी में धूप और, बारिश में बरसात से बचने के लिए यात्रियों के पास कोई उपाय नहीं है।

इस बार भी चुनाव में नेताओं ने अपने प्रचार भाषणों में विकास की बात कही है। देखना होगा सालेकसा तालुका को बस स्टैंड और यात्रियों को प्रतीक्षा के लिए छत इस बार बनती है या आगे भी लोगों को इसी तरह रास्ते पर धुप और बारिश में मजबूरन बस का इंतज़ार करना पड़ता है।

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