Published On : Tue, Sep 2nd, 2014

वरूड : तेंदुए के खाल के तस्कर गिरफ्तार


तस्कर गिरोह से 90 लाख की खाल बरामद

Warud tendua khaal
वरूड (अमरावती)

तेंदुओं को मारकर उनकी खाल, नाख़ून व अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह को फारेस्ट विभाग ने धर धबोचा है. गिरफ्तार किये गए 2 आरोपियों फिरोज शहा बब्बू शहा (31, बुधवारपेठ काटोल) व दिनेश गजानन बेलखड़े (24 लाड़गांव, काटोल) से, मारुति वैन जब्त कर तेंदुए की खाल भी बरामद कर ली गई है. जिसका मूल्य 90 लाख रूपये आंका गया है.

खरीददार बनकर पकड़ा
तहसील के वैन क्षेत्र में बाघ का शिकार होने की गुप्त जानकारी मिलने से गत 1 माह से वनविभाग के अधिकारी-कर्मचारी इन शिकारियों पर घात लगाए बैठे थे. इसके लिए वैन विभाग ने एक जाल बिछाया. जिसके तहत एक वन कर्मचारी तेंदुए की खाल का खरीददार बनकर इन तस्करों से मिला और सौदा तय किया. इन तस्करों ने समय और दिन तय कर उसे खाल लेने के लिए बुलाया. तय प्लान के अनुसार कागजों की नोटों के साथ अधिकारीयों ने इन वनकर्मी को वहां भेजा, लेकिन समय-समय पर ठिकाना बदलने के चलते वन विभाग के कर्मियों की नाक में दम आने लगा. आरोपियों ने रविवार को फिर इस वनकर्मी को खाल लेने के लिए वरूड़ से आमनेर मार्ग पर बुलाया. यहां पर वन विभाग ने चप्पे-चप्पे पर अपने सिपाही सादे वेश में खड़े कर दिए.

5 आरोपी फरार
वनअधिकारी विशाल निंभोरकर, वननिरीक्षक आशीष चक्रवर्ती, डी.एच. वालके, भारत आलसपुरे ने किराये की गाड़ी मंगवाकर काटोल से इन आरोपियों का पीछा किया। तय प्लान के अनुसार वनकर्मी अमोल चौधरी ने 90 लाख रूपए में खाल का सौदा किया. जाल बिछाए जाने का अंदेशा होते ही चौधरी से नोटों की सुटकेस लेकर आरोपी मारूति वैन (क्रमांक एमएच 40 के.आर.1067) में बैठकर भागने लगे. लेकिन वन विभाग के अधिकारीयों ने एक को धर दबोचा तथा दूसरे का पीछा किया. अन्य आरोपी गाड़ी को वहीं छोड़ फरार हो गए. पकडे गए दोनों आरोपियों से विश्रामगृह में पूछताछ की गई.

Warud tendua khaal
ढ़ाई मीटर लंबी है खाल
आरोपियों से जब्त खाल 6 साल के तेंदुए की बताई जा रही है पूंछ से लेकर नाक तक अखंड स्वरूप की इस खाल की लंबाई ढाई मीटर है. यह तेंदुआ ढाई फीट उंचा होगा ऐसा अंदाज वनअधिकारी लगा रहे है. वनविभाग के पास लॉकअप की व्यवस्था न होने से वनविभाग ने फ़िलहाल इन आरोपियों को पुलिस स्टेशन के लॉकअप में रखा है. वनविभाग इस गिरोह के सरगना और अन्य फरार साथियों की तलाश में है. वनकर्मियों की हड़ताल के कारण शिकारियों के हौसले बढ़ रहे है. जिसके चलते शिकार और तस्करी की घटनाओं की संख्या में इजाफा हुआ है.