Published On : Thu, May 15th, 2014

यवतमाल : बाबासाहब के राष्ट्रवाद का दुनिया में कोई मुकाबला नहीं : प्रा. पुरके


यवतमाल

Representational Pic

Representational Pic

डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के राष्ट्रवाद का दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है. भारतीय संविधान के शिल्पकार के रूप में उन्होंने देश को संविधान समर्पित करते हुए समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के जो सिद्धांत दिए हैं, उससे हर भारतीय नागरिक को प्रखर राष्ट्रवाद सीखने का मौका मिला है. विधानपरिषद के उपसभापति और रालेगांव के विधायक प्रा. वसंत पुरके ने यह प्रतिपादन किया.

वे रालेगांव तालुका के ग्राम वरध में आयोजित बुद्ध जयंती समारोह में बोल रहे थे. वरध में भगवान गौतम बुद्ध, महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के जयंती के अवसर पर 13 मई को बुद्ध जयंती समारोह का आयोजन किया गया था. समारोह का उद्घाटन प्रा. पुरुषोत्तम पाटिल ने किया, जबकि प्रमुख अतिथि के रूप में जिला महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अधि. सीमा तेलंगे, रालेगांव प.स. के सभापति अशोक केवटे आदि उपस्थित थे.

प्रा. पुरके ने कहा कि डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने सभी कसौटियों पर कसने के बाद ही दलितों को बुद्ध धम्म की दीक्षा दी. भगवान तथागत का धम्म विज्ञानवादी है और विज्ञान मनुष्य को आंखें खोलकर जीना सिखाता है. भगवान डोफे ने प्रास्ताविक भाषण किया. सुरेश सोनुर्ले ने अपनी पत्नी की स्मृति में तथागत गौतम बुद्ध की मूर्ति भेंट की. इस मौके पर अतिथियों के हाथों बुद्धविहार का लोकार्पण भी किया गया. कार्यक्रम का संचालन परमानंद बन्सोड ने किया, जबकि आभार रमेश लाकडे ने माना. कार्यक्रम में भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.