नागपुर – स्मार्ट बन रहे शहर में नालियों और सीवर लाइन का जाम होना आम बात है। पानी और मलनिस्सारण के लिए कई कारण है। पर्यवरण पर अध्ययन करने वाले लोगों के मुताबिक माहवारी के दिनों में इस्तेमाल में लायी जाने वाली सेनेटरी नैपकिन को शर्म की वज़ह से नालियों में बहाया जाना भी प्रमुख कारण है। इस समस्या से निज़ात पाने के लिए महिला दिवस के अवसर पर नागपुर महानगर पालिका के साथ रोटरी क्लब ,रेनुवासियो,स्वच्छ नागपुर,इको फ्रेंडली लिविंग फाउंडेशन जैसी संस्थाओं ने पहल कर एक जनजागृति अभियान की शुरुवात की। जिसका मकसद सेनिटरी नैपकिन को उचित तरीक़े से नष्ट कराने का तरीका समझाना है।
इस अभियान के तहत संस्था से जुड़े सुपर हायजिन लोग शहर की विभिन्न सोसायटी और गर्ल्स हॉस्टल में जाकर रजिस्ट्रेशन कर बार कोड़ दे रहे है। रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद संस्था के लोग महीने में एक बार खुद जानकर सेनेटरी नैपकिन कलेक्ट कर उसे प्रक्रिया के साथ नष्ट भी कर रहे है।
जिसमे सुपर हायजिन से जुड़े लोग गर्ल्स हॉस्टल और सोसाइटी में जाकर रजिस्ट्रेशन कर रहे है और उन्हें बार कोड दे रहे है । जिसके बाद सुपर हाइजीन के लोग 30 रुपए प्रति महीने में आकर यह सेनेटरी नैपकिन लेकर भी जा रहे है । यह काम शहर में जोरदार तरीक़े से शुरू है लेकिन इसमें एक विवाद आ खड़ा हुआ है। यह काम जिन संस्थाओं के माध्यम से किया जा रहा उनका मनपा के साथ किसी भी तरह का करार नहीं होनी की बात सामने आयी है। मतलब जो भी यह काम कर रहे है उसका मनपा से कोई लेना देना नहीं है और न ही मनपा से इस काम के लिए किसी संस्था को जनता से पैसे वसूलने का अधिकार ही दिया है।
सवाल यह भी है की जब कनक रिसोर्सेज शहर से यह वेस्ट उठा रही है और सुपर हाइजीन लोग सरकारी अस्पतालों में जाकर सेनेटरी नैपकिन लेकर उसे नष्ट कर रहे है। तो इन एनजीओ द्वारा 30 प्रति महीना लेकर इस उपक्रम की शुरुवात करना कहा तक उचित है। ख़ास यह भी है की जो संस्थाएं यह काम कर रही है उनका रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। नाम सार्वजनिक न किये जाने की शर्त पर शहर की स्वछता से जुड़े व्यक्ति ने बताया की जिन संस्थाओ ने इस काम की शुरुवात की है वह पूरी तरीके से गलत है। क्योंकि सेनेटरी नैपकिन जैसा वेस्ट उठाने के लिए मनपा द्वारा पहले से ही दो लोग वैध तरीके से कार्यरत है। और ऐसे में इन संस्थाओ की ओर से पैसे लेकर मनमाने ढंग से ऐसा उपक्रम चलाना और उसका प्रचार करना पूरी तरीके से गलत है।
वही शहर में शुरू इस तरह के काम की जानकारी लेने के लिए जब महानगर पालिका के मुख्य स्वास्थ अधिकारी डॉ.प्रदीप दातरवर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया की इन संस्थाओ की ओर से सेनेटरी नैपकिन उठाने का प्रपोजल आया है। लेकिन अब तक महानगर पालिका की ओर से इन संस्थाओ को मान्यता इस काम का अधिकृत तौर पर अधिकार नहीं दिया गया है। साथ ही इसके उन्होंने यह भी बताया की अगर यह प्रपोजल मंजूर होता है तो हायर अथॉरिटी तय करेगी की पैसे लेने है या नहीं। उससे पहले जनता की दिशाभूल किया जाना गलत है।
शहर में इस समस्या को उठाने वाली और इस योजना की प्रमुख मार्गदर्शक नगरसेविका प्रगति पाटिल से बात करने पर उन्होंने बताया की शहर के 4 से 5 फ्लैट स्कीमो में रजिस्ट्रेशन किए जा चुके है। साथ ही इस उपक्रम को शहर की महिलाओ की ओर से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। पाटिल से जब पूछा गया की मनपा के स्वास्थ विभाग प्रमुख का कहना है की इस प्रोपोसल को अभी तक मंजूर नहीं किया गया तो पाटिल ने बताया की इस मुहीम के बारे में मनपा स्वास्थ विभाग प्रमुख को ही मुहीम की जानकारी नहीं है। जबकि संस्थाओ की ओर से पत्र परिषद लेकर जानकारी दी गयी थी।
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