Published On : Mon, May 12th, 2014

भंडारा : आखिर क्या मतलब है प्रफुल्ल पटेल की चुप्पी का


भाजपा में शामिल होने की खबर से जिले की राजनीति में हड़कंप


भंडारा 

Representational Pic

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प्रफुल्ल पटेल के भाजपा में शामिल होने की खबर से जिले के राजनीतिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. लोकसभा चुनाव के नतीजे 16 मई को आने वाले हैं. पूरे देश में चुनाव नतीजों को लेकर उत्सुकता का माहौल है, किंतु भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र में पटेल की राजनीति को लेकर चर्चा का बाज़ार तेज हो चुका है.

प्रारंभ से ही कांग्रेस विचारधारा से जुड़े रहे प्रफुल्ल पटेल के भाजपा में कम विरोधी नहीं हैं. इस बार प्रफुल्ल पटेल छठी बार भंडारा क्षेत्र से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. 2004 में शिशुपाल पटले से प्रफुल्ल पटेल को हार का सामना करना पड़ा था. इसके अलावा 1991, 1996, 1998 एवं 2009 में पटेल को जीत हासिल हुई थी. 10 अप्रैल को हुए चुनाव में पटेल को भाजपा प्रत्याशी नाना पटोले ने भारी चुनौती दी है.

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पटेल की विकास की राजनीति
मोदी लहर ने पटेल की विकास की राजनीति को पछाड़ कर रख दिया है. चुनावी प्रचार के दरम्यान मोदी की जनसभा का इस क्षेत्र में न होना प्रफुल्ल पटेल की जीत मानी जा रही थी, पर जातीय समीकरणों के चलते भाजपा उम्मीदवार की जीत के आसार बढ़ गए हैं. भाजपाई कार्यकर्ता जीत का जश्न मनाने की तैयारी में जुट चुके थे, ऐसे में प्रफुल्ल पटेल की भाजपा में शामिल होने की संभावना की खबर से भाजपाई कार्यकर्ताओं के होश उड़ गए हैं.

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हारें या जीतें मंत्री बने रहेंगे
प्रफुल्ल पटेल 2004 में हार के बाद राज्यसभा से सांसद बने थे और उन्हें हवाई मंत्री का पद मिला था. दुर्भाग्यवश इस बार संप्रग के सत्ता में आने के आसार धुंधले नजर आ रहे हैं. इलाके में चर्चा है कि इसी के चलते पटेल ने भाजपा में शामिल होने की योजना बनाई है. एनसीपी के खेमे में तो यह भी चर्चा है कि पटेल हारें या जीतें, वे मंत्री तो बने ही रहेंगे. एनसीपी मुखिया शरद पवार एवं प्रफुल्ल पटेल की भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के साथ बढ़ रही नजदीेकियों से इस चर्चा की पुष्टि हो रही है. प्रफुल्ल पटेल की कथित चुप्पी ने संशय को और बढ़ा दिया है.

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