Published On : Thu, Sep 4th, 2014

भंडारा : अब शीघ्रता से पूर्ण हो सकेंगी ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं

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जिप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्विवेदी ने उम्मीद जताई


राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम कार्यशाला संपन्न


rashtriy Gramin peyjal bhandara
भंडारा

केंद्र सरकार द्वारा चलाए जाने वाले राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से भंडारा जिला परिषद के जिला पानी व स्वच्छता मिशन की ओर से हाल ही में एक दिवसीय जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिला परिषद के सभागृह में संपन्न इस कार्यशाला में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई. कार्यशाला की अध्यक्षता जिला परिषद भंडारा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल द्विवेदी ने की, जबकि प्रमुख अतिथि के रूप में ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता सतीश सुशीर, उप कार्यकारी अभियंता श्रीमती वी. वी. कर्णेवार, उप अभियंता श्री देशमुख, उप अभियंता बावणकर, उप अभियंता गोन्नाडे, भारत निर्माण कक्ष नागपुर के शाखा अभियंता पी. एम. सावरकर, उप लेखापाल वी. सी. पिपरे और कक्ष अधिकारी जे. वाय. बलभद्रे उपस्थित थे.

राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज और संत गाडगे बाबा की प्रतिमाओं के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से प्रारंभ कार्यक्रम में सर्वप्रथम अतिथियों का स्वागत किया गया. जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल द्विवेदी ने अपने भाषण में विभिन्न जानकारी दी और उम्मीद जताई कि नियमों में सुधार से भविष्य में जलापूर्ति योजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण किया जा सकेगा. कार्यकारी अभियंता सतीश सुशीर ने बताया कि पहले जलापूर्ति योजनाओं को पूर्ण करने के लिए 10 प्रतिशत जन-सहयोग आवश्यक होता था. अब इस शर्त को सरकार ने खत्म कर दिया है. इसलिए अब ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को शीघ्र पूरा करने में आने वाली दिक्कतें समाप्त हो गई हैं.

rashtriy Gramin peyjal bhandara
प्रास्ताविक भाषण में कर्णेवार ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सरकार के नए संशोधित नियमों के अनुसार कैसे कार्यक्रम का लाभ उठाया जाए. कार्यक्रम का संचालन अजय गजापुरे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन बबन येरणे ने किया. कार्यक्रम की सफलता के लिए जिला कार्यक्रम व्यवस्थापक डी. एस. बिसेन, मानव संसाधन विकास सलाहकार अंकुश गभणे, मूल्यांकन और संनियंत्रण सलाहकार सुशांत ढोके, सूचना शिक्षा संवाद विशेषज्ञ कु. नीलिमा जवादे, लेखाधिकारी प्रशांत फाये, स्वच्छता विशेषज्ञ गजानन भेदे, भूषण मुले और देवेंद्र खांडेकर ने प्रयास किया.

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