Published On : Fri, Aug 22nd, 2014

ब्रम्हपुरी : चार धान उत्पादक तालुके सूखाग्रस्त सूची से बाहर


तालुकों के किसानों ने निकाला मोर्चा, अन्याय पर विरोध जताया


ब्रम्हपुरी

Morcha Vidhayak deshkar
चंद्रपुर जिले के धान उत्पादक तालुकों पर एक बार फिर अन्याय हुआ है. सरकार ने राज्य के कुल 123 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है, जिसमें चंद्रपुर जिले के 11 तालुके भी शामिल हैं. मगर इसमें सिंदेवाही, सावली, ब्रम्हपुरी और चिमूर जैसे धान उत्पादक तालुके शामिल नहीं हैं. इसके विरोध में यहां के किसानों ने जिला भाजपा अध्यक्ष विधायक अतुल देशकर के नेतृत्व में एक मोर्चा निकाला और तहसील कार्यालय पर धावा बोल दिया. सूखाग्रस्त तालुकों की सूची में शामिल करने की मांग से संबंधित एक ज्ञापन उपविभागीय अधिकारी के सुपुर्द किया गया.

बारिश की बेरुखी से सब हैं परेशान
इस मौसम में बारिश की बेरुखी से सब परेशान हैं. बारिश कहीं शत-प्रतिशत हुई है तो कहीं 10 से 25 फीसदी ही. यही कारण है कि अभी भी 40 प्रतिशत बुआई होना बाकी ही है. जो बुआई हुई है वहां भी पौधे कुम्हलाने लगे हैं. सिंदेवाही तालुका के घोडाझरी तालाब का जलसंग्रह घटकर 47 फीसदी ही रह गया है. पिछले 14 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ. उधर, सावली के आसोलामेंढा तालाब में जलसंग्रह तो 63 प्रतिशत है, मगर खेती के काम केवल 33 प्रतिशत पानी ही आएगा.

पानी है तो बिजली नहीं
ब्रम्हपुरी तालुका में 15 जुलाई को 117.9 मिमी और 29 जुलाई को 223.04 मिमी बारिश दर्ज है. लेकिन यह बारिश पर्याप्त नहीं है. कुछ स्थानों पर तो बहुत ही कम बारिश दर्ज की गई है. चिमूर तालुका की हालत भी ऐसी ही है. कुछ स्थानों में नाले, कुएं, खेत-तालाब और नदी से सटे कृषि पंप लगे हैं, वहां पानी भी है, मगर बिजली महारानी 12 से 16 घंटे तक दर्शन ही नहीं देतीं. इससे किसानों का भारी नुकसान हो रहा है.

लोडशेडिंग बंद करने की मांग
ऐसे में किसानों ने मोर्चा निकाला और लोडशेडिंग बंद करने की मांग की. मांग यह भी की गई कि पिछले साल हुई अतिवृष्टि की भरपाई अब तक नहीं मिली है जो अब तत्काल दी जाए, एपीएल-बीपीएल राशन कार्डधारकों को त्यौहारों के दिनों में शक्कर दी जाए, संजय गांधी और श्रावण बाल योजना के लाभार्थियों को एक हजार रुपए अनुदान दिया जाए, अतिक्रमणधारकों को जमीन के पट्टे दिए जाएं और मनरेगा के अंतर्गत किए गए कामों का मेहनताना मजदूरों को शीघ्र दिया जाए.


सैकड़ों किसानों की हिस्सेदारी
मोर्चे में दीपक उराडे, वंदना शेंडे, नामदेव लांजेवार, कृष्णा सहारे, नानाजी तुपट, रामलाल दोनाडकर, सुरेखाताई बालपांडे, धनराज मुंगले, वसंत वारजूकर, रीता उराङे, योगेश राउत सहित सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया.