चिमूर
माना जमाती के उम्मीदवारों को अनुसूचित जमाती प्रवर्ग के वैधता प्रमाणपत्र को नकारने वाले मुद्दों को लेकर दाखिल किये गए जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में सुनाई के दौरान अचानक जात जांच समिति की ओर से जनहित याचिका को स्थगित करने की विनती की गई जिसके बाद मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने इस जनहित याचीका की सुनाई स्थगित की है. ऐसी जानकारी स्वाभिमानी किसान संघटना के जिला अध्यक्ष नारायण जांभुले ने पत्रकार परिषद में दी.
1967 पूर्व गडचिरोली, सिरोंचा, मेलघाट आदि आदिवासी क्षेत्र में रहनेवाले नागरिकों को ही अनुसूचित जमाती प्रवर्ग के जात वैधता प्रमाणपत्र देने की अनुमति दी की गई थी. उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ के युगल पीठ ने इस विषय का सही खुलासा करने के लिए योगिता सोनवाने (ठाकुर) के 6103/10 इस याचिका को त्रिसदस्यीय पूरणपीठ के पास भेजा. यह विषय फिलहाल प्रलंबित रहने से नागपुर खंडपीठ ने माना जमाती संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई योगिता सोनवाने (ठाकुर) के 6103/10 इस याचिका के परिमाण के बाद करने व उसके लिए याचिकाकर्ताओं को फिर से न्यायलय में अर्ज़ी देने की स्वतंत्रता दी है. उच्च न्यालय के खंडपीठ में माना जमाती के ओबीसी के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा बनावटी सरकारी दस्तावेज पेश करने की बात साबित हुई है और अचानक क्षेत्रबंधन का मुद्दा उपस्थित करनके समिति ने माना जमाती को भ्रमित किया है ऐसी चर्चा शुरू है.
पत्रकार परिषद में विठ्ठल गजभे, भरत जांभुले, भुजंग वाघमारे, विलास कारमेंगे, मोतीराम कारमेंगे आदि उपस्थित थे.
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