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    Published On : Thu, May 15th, 2014
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    चंद्रपुर : 14 साल से अधिग्रहित जमीन का टैक्स भर रहे हैं वरोरा के किसान


    डेढ़ हजार किसान परेशान, जमीन भी गई और सिंचाई को पानी भी नहीं मिला


    चंद्रपुर

    mandawkar
    भूसंपादन संस्था और सरकार के जलसंपदा विभाग की मार्फ़त करीब 14 साल पहले सिंचाई के लिए वरोरा तालुका के करीब 1500 किसानों की कुछ जमीन अधिग्रहित की गई थी. मजे की बात यह है कि 14 साल बीतने के बाद भी उक्त जमीन सरकार के नाम नहीं चढ़ी है. अभी भी अधिग्रहित जमीन का कृषिकर किसानों से ही वसूला जा रहा है.
    सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की दृष्टि से सरकार ने वरोरा तालुका के किसानों के लिए लाल पोथरा संयुक्त नहर के नाम से एक योजना शुरू की थी. इसके लिए मुख्य नहर और वितरिका बनाने के लिए करीब 313 हेक्टेयर जमीन वर्ष 2000 में अधिग्रहित की गई थी. सरकार के सिंचाई विभाग ने 150 हेक्टेयर जमीन लाल पोथरा के लिए और 163 हेक्टेयर जमीन लभानसराड के लिए 14 वर्ष पूर्व अधिग्रहित की थी. किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने का भरोसा दिलाया गया. कहा गया, उनकी जमीन अब सिंचाई के तहत आ जाएगी.

    जमीन भी गई, कृषिकर भी जारी
    सामान्य तौर पर जमीन के अधिग्रहण के बाद मूल मालिक की जमीन उसके नाम से हट जाती है और नए मालिक का नाम चढ़ा दिया जाता है. लेकिन इस मामले में ऐसा हुआ नहीं और सरकार उस जमीन का कृषिकर भी उसी किसान से वसूूल रही है, जिसकी जमीन अधिग्रहित की गई है.

    खेत बेचने का विकल्प भी छिना
    चूंकि अधिग्रहित जमीन किसान के नाम से अब तक हटाई नहीं गई है, इसलिए किसान अपनी जमीन किसी को बेचने की हिम्मत भी नहीं कर सकते. आसमानी और सुल्तानी संकट से जूझ रहे किसान को परिवार में यदि किसी की शादी-ब्याह करना हो तो उसके सामने सिवाय अपना खेत बेचने के और कोई विकल्प नहीं बचता, मगर सरकार ने यह विकल्प भी उनसे छीन लिया है. इस क्षेत्र के किसानों की मांग है कि अधिग्रहित जमीन को सरकार अपने नाम कर ले और बाकी जमीन का सात-बारह बनाकर किसानों को दे दिया जाए.

    कृषिकर वापस करो, अन्यथा आंदोलन : इंजि. मांडवकर
    लाल पोथरा संयुक्त कालवा पानी संघर्ष समिति के अध्यक्ष और बोर्डा ग्राम पंचायत के उपसरपंच इंजि. ओमप्रकाश मांडवकर ने बताया कि जिस काम के लिए जमीन ली गई वह काम अब तक लंगड़ा रहा है. सात-बारह प्रमाणपत्र नहीं बनने के कारण किसानों को अभी भी अपनी अधिग्रहित जमीन का कृषिकर भरना पड़ रहा है. समिति ने सरकार से किसानों द्वारा अब तक भरा गया कृषिकर वापस करने और किसानों को उनका सात-बारह बनाकर देने की मांग की है.

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