Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
    | | Contact: 8407908145 |
    Published On : Wed, Jun 11th, 2014
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    चंद्रपुर : बिल्ट प्लांटेशन के कामगारों को मिलेंगे 3.65 करोड


    बिल्ट की गलती हुई साबित

    वेतन के अंतर के साथ ही नुकसान भरपाई करने का आदेश

    चंद्रपुर
    Built company
    बिल्ट ट्री टेक प्लांटेशन बल्लारपुर व आष्टी में कार्यरत श्रमिकों को बिल्ट प्रबंधन द्वारा न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा था. जिसके विरोध में यहां के श्रमिकों ने विदर्भ प्रहार कामगार संगठन के नेतृत्व में सहायक कामगार आयुक्त तथा न्यूनतम वेतन अधिनियम के प्राधिकारी के पास न्याय की गुहार लगाई थी. लंबी लडाई के बाद प्राधिकारी पी.एल. बाभुलकर ने इन कामगारों को मूल वेतन का अंतर व नुकसान भरपाई मिला कर 3 करोड. 65 लाख 47 हजार 965 रु देने का आदेश दिया है. उक्त जानकारी कामगार संगठन की नेता अधि. हर्षल कुमार चिपलुनकर ने आज यहां आयोजित पत्रकार परिषद में दी.

    चिपलुनकर ने बताया कि अवंथा ग्रुप की कंपनी बिल्ट ट्री टेक द्वारा बल्लारपुर में 12 व आष्टी में 8 वर्षों से वहां के श्रमिकों को गुमराह कर तथा गलत जानकारी देकर उनका शोषण कर रहा था. उन्हे न्यूनतम वेतन से काफी कम वेतन दिया जा रहा था. जिसे विदर्भ प्रहार कामगार संगठन के माध्यम से उन्होंने उठाया और न्याय के लिए कामगार आयुक्त के पास मुकदमा दायर किया. दोनों पक्षों की सुनने के बाद न्यायालय प्राधिकारी इस निर्णय पर पहुंचे की बिल्ट ट्री के कामगारों को न्यूनतम वेतन के अनुसार कंपनी वेतन नहीं देती. इस वजह से प्राधिकारी ने कामगार संगठन के दावे के अनुसार धारा 20(3) के अनुसार मूल अंतर की राशि सहित 8 गुना नुकसान भरपाई 30 दिनों के भीतर जमा कराने का आदेश दिया है. जिसके अनुसार बल्लारपुर के 92 कामगारों को उनके मूल वेतन के अंतर के 18 लाख 50 हजार 158 रु व नुकसान भरपाई के 1 करोड. 45 लाख 21 हजार 264 रु. मिलाकर 1 करोड. 36 हजार 422 रु. तथा आष्टी के 99 श्रमिकों को मूल वेतन के अंतर की राशि 22 लाख 45 हजार 727 रु. व नुकसान भरपाई की राशि 1 करोड. 69 लाख 65 हजार मिलाकर 2 करोड. 2 लाख 11 हजार 965 रु. मिलेंगे.

    अपने आदेश में प्राधिकारी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह उद्योग कृषि संबंधी उद्योग में न आकर वन व वनीकरण में आता है और यहां पर वन व वनीकरण श्रेणी का ही वेतन लागू होता है.

    प्राधिकारी के इस निर्णय से बिल्ट प्रबंधन की समस्याएं बढ गई है. इससे पूर्व श्रमिक न्यायालय ने माथाडी कामगारों को भी बैठा वेतन देने का आदेश दिया था. अब ट्री प्लांटेशन के कामगारों को इतनी मोटी राशि देने का आदेश दिए जाने से बिल्ट के माथे पर बल पड.ने की संभावना है. इस मामले में कामगार संगठन की ओर से अधि. हर्षल चिपलुनकर तथा बिल्ट की ओर से अधि. एस.आर. हस्तक ने पैरवी की.

    पत्रकार परिषद में वर्षा कोतपल्लीवार, दिवाकर लखमापुरे, विमला जोगेलवार, लीलावती पटले, पुष्पा ढोके, पूर्णिमा गुडे.कर आदि उपस्थित थे.

    Stay Updated : Download Our App
    Mo. 8407908145