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    Published On : Fri, Apr 25th, 2014
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    चंद्रपुर : बिना नोटिस कैसे कर दिया निलंबित

    महापौर संगीता अमृतकर

    महापौर संगीता अमृतकर

    पुगलिया समर्थकों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से पूछा सवाल

    चंद्रपुर

    चंद्रपुर लोकसभा चुनाव होने के बाद अब कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी फिर सतह पर आ गई है. इसका असर पार्टी के संगठनात्मक नीतियों पर पड़ रहा है. हाल में निलंबित किए गए चंद्रपुर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र भेजकर सवाल किया है कि बिना किसी शोकॉज नोटिस के प्रदेश कांग्रेस ने निलंबन की कार्रवाई कैसे की ? इन कार्यकर्ताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप में निलंबित किया गया है.

    टिकट के लिए खींचतान
    लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही कांग्रेस का टिकट पाने के लिए स्थानीय नरेश पुगलिया और संजय देवतले गुटों के बीच रस्सीखेच शुरू हो गई थी. लेकिन पार्टी ने पुगलिया को दरकिनार कर देवतले को टिकट दिया. आलाकमान के इस फैसले से नाराज पुगलिया समर्थकों ने इसकी भर्त्सना करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष को इसके विरोध में चिट्ठी लिखी. पुगलिया समर्थकों ने इस फैसले को आत्मघाती तक कहा. अपना पक्ष सुने जाने की मांग को लेकर तो कुछ ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा तक दे दिया, लेकिन पार्टी का फैसला बदला नहीं. तभी से दोनों गुटों के बीच विवाद बढ़ने लगा.

    नियमानुसार कार्रवाई की मांग
    इस बीच प्रदेश कांग्रेस को जब यह शिकायत मिली कि चुनाव में पुगलिया गुट ने काम नहीं किया है, तो पार्टी ने इसकी गंभीर दखल ली. परिणाम, पुगलिया गुट के 8 कार्यकर्ताओं को निलंबित कर दिया गया. जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई उनमें महापौर संगीता अमृतकर, शहर जिलाध्यक्ष गजानन गावंडे, मनपा सभापति रामू तिवारी, मनपा सदस्य अशोक नागापुरे, प्रवीण पड़वेकर, उषा धांडे, बल्लारपुर नगर परिषद अध्यक्ष रजनी मूलचंदानी और घनश्याम मूलचंदानी शामिल हैं. एक बार फिर आंतरिक गुटबाजी के सतह पर आने के बाद चर्चाओं को पंख लग गए हैं.
    निलंबित पदाधिकारियों ने नियमानुसार कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की है.

    देवतले पर भी लगे थे यही आरोप
    इन कार्यकर्ताओं ने कहा है कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में देवतले पर भी तत्कालीन कांग्रेस उम्मीदवार नरेश पुगलिया के खिलाफ काम करने का आरोप लगा था, जिसका लाभ भाजपा को मिला था. उस चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सभा तक में देवतले उपस्थित नहीं रहे थे. तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से शिकायत की गई थी. देवतले के क्षेत्र में भाजपा को बढ़त मिली. देवतले को सिर्फ कारण बताओ नोटिस दिया गया. इतना ही नहीं, बाद में देवतले को विधानसभा का टिकट, चंद्रपुर का पालकमंत्री पद, गढ़चिरोली का संपर्क मंत्रिपद और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव का टिकट देकर उन्हें पुरस्कृत किया गया. कार्यकर्ताओं ने कहा है की पार्टी के संविधान के मुताबिक कम से कम दो हफ़्तों का नोटिस देकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियमों का पालन किया जाए

     


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