Published On : Fri, Aug 22nd, 2014

चंद्रपुर : बाघ पर नहीं थम रहा विवाद

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मुख्य वनसंरक्षक ने दी सफाई, 7 में से 5 लोगों को मारा था

चंद्रपुर

Tiger (Chandrapur)
पोंभूर्णा तहसील में बाघ के हमले में 7 लोगों के मारे जाने और उसके बाद वन विभाग द्वारा उसे मार देने के बाद जो विवाद उठा, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है. वन्यजीव प्रेमियों ने एक दिन पूर्व ही वनविभाग को कटघरे में खड़ा कर इस मामले में उसकी कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए थे. इसके बाद गुरवार को मुख्य वनसरंक्षक संजय ठाकरे ने पत्र परिषद में दावा किया कि, मारे गए 7 लोगों में से 5 का शिकार इसी बाघ ने किया था. पोंभूर्णा में मरने वाले बाघ की मानिटरिंग की जा रही थी. मारे गए 7 में से 5 लोगों को इसी बाघ ने मारा, जो कैमरा ट्रैक में आया है. चिंतलधाबा परिसर में और 2 बाघ होने की जानकारी भी उन्होंने दी.

प्रयोगशाला भेजा जायेगा मस्तिष्क
मुख्य वनसंरक्षक ने बताया कि मारे गए बाघ का डॉ. कडुकर, डॉ. चित्रा राऊत, डॉ. छोनकर और डॉ. खोब्रागड़े ने पोस्टमार्टम कर विसरा प्रयोगशाला भेजा. उसकी रिपोर्ट मिली लेकिन वह अधूरी है. अब बाघ का मस्तिष्क प्रयोगशाला भेजा जा रहा है. ठाकरे ने बताया कि चंद्रपुर वनवृत्त क्षेत्र में चंद्रपुर, ब्रह्मपुरी और मध्य चांदा प्रादेशिक वनविभाग का समावेश है. इसके अलावा वनवृत्त अंतर्गत ताड़ोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प का वनक्षेत्र तथा वन विकास महामंडल वनक्षेत्र का समावेश है. तीनों वनविभाग में करीब 100 वयस्क बाघ है, जिनमें 29, ब्रह्मपुरी में 36 और मध्य चांदा में 35 बाघ का समावेश है.

जंगली जानवरों के हमलों में 17 की मौत
मुख्य वनसंरक्षक ठाकरे ने बताया कि इस वर्ष अगस्त 2014 तक जंगल जानवरों के हमलें में 17 लोगों की मौत हुई है. इनमें से 12 लोगों की मौत बाघ के हमले में, 1 की तेंदुए, 3 की जंगली सुअर और 1 की मौत भालू के हमले में हुई है. ठाकरे ने बताया कि पिछले 3 महीने में पोंभूर्णा तहसील के मांगली, धनोटी, डोंगरहल्दी आदि गांवों के 4 किमी परिधि में बाघ ने आतंक मचा रखा था. पोंभूर्णा तहसील की 7 घटनाओं में से 5 घटनाएं वनविकास महामंडल क्षेत्र और 2 प्रादेशिक वनविभाग क्षेत्र में हुई. जिले का 84 प्र.श. क्षेत्र वनाच्छित होने से मानव-वन्यप्राणी संघर्ष चला आ रहा है.

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1.41 करोड़ का मुआवजा
ठाकरे ने बताया कि वन्यजीव मानव संघर्ष में मरने वालों के परिजन, घायल, पशु, फसलों की नुकसान भरपाई दी जाती है. अगस्त 2014 तक 1.41 करोड़ की नुकसान भरपाई दी गई है. वर्ष 2013-14 में 2.15 करोड़, वर्ष 2012-13 में 1.53 करोड़, वर्ष 2011-12 में 1.69 करोड़ रूपए की नुकसान भरपाई दी गई थी. वर्ष 2010 से अब तक जंगली जानवरों के हमले में 62 लोगों की मौत हो चुकी है. पिछले 3 वर्षों में जंगली जानवरों की आपसी लड़ाई, बीमारी तथा अन्य कारणों से 13 बाघ और 17 तेंदुओं की मौत हुई है. पात्र परिषद में ताड़ोबा के क्षेत्र संचालक गरड, एफडीसीएम उत्तर चंद्रपुर के जी.एम. डोले आदि उपस्थित थे.

नहीं बचा था पर्याय
मुख्य वनसंरक्षक ठाकरे ने बताया कि 25 जुलाई को बाघ को बेहोश कर पकड़ने की अनुमति दी गई थी. किंतु बरसात के दिन, जल्दी सूर्य डूब जाना, घने जंगल में उगी झड़ियां, लोगों का आना-जाना, पास में गांव होने से उसे बेहोश कर पकड़ना संभव नहीं हो पा रहा था. 17 अगस्त को डोंगरहल्दी गांव निवासी दत्तु पांडुरंग ढोले (35) का बाघ द्वारा शिकार किए जाने के बाद बाघ को शूट करने के आदेश मिले. इसके बाद जंगल में 6 शूटर, 4 स्थानों पर पिंजरे, टैक्यूलाइजिंग विशेषज्ञ, पशु वैद्यकीय सलाहकार डॉ. खोब्रागड़े के साथ डोंगरहल्दी गांव से सारे परिसर में बाघ की तलाश शुरू की गई. शाम के समय बाघ एक नाले के पास बैठा दिखाई दिया. उसे बेहोश करने का प्रयास किया जाता, किंतु घनी झाडी और शाम होने से उसके भागने की संभावना थी. ऐसे में कोई पर्याय नहीं बचने और सुरक्षा की दृष्टी से बाघ को गोली मारने के आदेश देने की बात उन्होंने कही.

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