Published On : Tue, May 13th, 2014

चंद्रपुर : झोलाछाप डॉक्टरों की बल्ले-बल्ले है चंद्रपुर जिले में


मरीजों को लूट रहे हैं 215 बोगस डॉक्टर


चंद्रपुर

चंद्रपुर जिले में बोगस डॉक्टरों की संख्या बढ़ती जा रही है. सरकारी रुग्णसेवा के खुद बीमार होने क़े कारण जिधर – उधर बोगस डॉक्टर बोर्ड टांगकर बैठ गए हैं. जिला स्वास्थ्य विभाग में फिलहाल 215 बोगस डॉक्टरों के नाम दर्ज़ हैं. जनता की मांग है कि प्रशासन इस तऱफ ध्यान देकर बोगस डॉक्टरों के चंगुल से उसे बचाए.

न दवा, न सुविधाएं और न डॉक्टर
जिले में ग्रामीण रुग्णालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क़े साथ ही अनेक गांवों में उपकेंद्र हैं. लेकिन ग्रामीण रुग्णालय सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी दवाओं की अनियमित आपूर्ति, कर्मचारियों की कमी, अत्याधुनिक सुविधाओं का अभाव और मेडिकल ऑफिसरों के रिक्त पदों के चलते सरकारी रुग्णसेवा के बुरे हाल हैं. इसी मौके का फायदा जिले में बोगस डॉक्टरों ने उठाया है. मेडिकल कौंसिल के प्रमाणपत्र के बगैर जिले के ग्रामीण भागों में दुकानें खोलकर ये डॉक्टर बैठें हैं. बोगस डॉक्टर मरीजों को दोनों हाथों से लूटते हैं. अनेक बोगस डॉक्टर तो एलआईसी के एजेंट भी हैं. एक ही कमरे में दवा और बीमा दोनों क़ी दुकानें खुलेआम चल रही हैं.

अनेक उपकेंद्रों में परिचारिकाएं तक नहीं
ग्रामीण जनता को शीघ्रता से स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की दृष्टि से तालुकास्तर पर ग्रामीण रुग्णालय और तालुका के बड़ी आबादी वाले गांवों में स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले गए, लेकिन इन ग्रामीण रुग्णालयों में दवाअों की कमी तो नियमित रूप से बनी रहती है. साथ ही कर्मचारियों की कमी और अत्याधुनिक सुविधाओं का घोर अभाव. यही स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भी है. अनेक उपकेंद्रों में तो परिचारिकाएं तक समय पर उप्लब्ध नहीं रहतीं.

खांसी हो या बुखार सलाइन जरूऱी
इसी मौके का फायदा उठाते हुए बड़े शहरों में चार से पांच वर्ष तक परिचर के रूप में काम करने वाले भी डॉक्टर बन बैठे हैं. इनके पास किसी किस्म का कोई मेडिकल सर्टिफिकेट भी नहीं होता. सर्दी, खांसी, बुखार जैसी बीमारियों पर ये कथित डॉक्टर खुलेआम लूट करते हैं. गंभीर रोगी के इन बोगस डॉक्टरों के पास जाने पर ये लोग दूसरे डॉक्टर के पास भेज देते हैं. कई बार तो दूसरे शहरों से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए जाते हैं और उसका खर्च भी मरीज को ही देना पड़ता है. जिले के चिमुर, पोंभरणा, चंद्रपुर, कोरपना, जिवती, राजुर और अन्य इलाक़ों का दौरा कर ये कहानियां सुनी जा सकती हैं.

. . . और भाग गया बोगस डॉक्टर
चिमुर तालुका के ग्राम डोमा में पिछले 5 से 6 माह से बिना किसी प्रमाणपत्र के एलआईसी एजेंट का बोर्ड़ लगाकर दवाखाना चलाया जा रहा था. गरीब मरीजों की लूट का धंधा खुलेआम जारी था. ग्रामीणों के ध्यान में यह बात आते ही लोगों ने उसके संबंध में जानकारी जुटाई. उससे कहा गया कि उसकी शिकायत की जाएगी. इसी बीच उसके बारे में खबर छप गई. फिर क्या था, हलधर नामक वह डॉक्टर भाग खड़ा हुआ.

कार्रवाई का अधिकार पुलिस को ही ; डॉ. आठयल्ये
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आठयल्ये ने साफ कहा कि बोगस डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार उन्हें नहीं, बल्कि पुलिस को है. इलेक्ट्रोपैथी के डॉक्टरों को सलाइन लगाना नहीं आता. अनेक डॉक्टर हर मरीज को सलाइन लगाकर उनकी लूट करते हैं. इस संबंध में शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम उन डॉक्टरों की जांच कर दस्तावेज मेडिकल कौंसिल की तरफ़ भेज देती है.

कहां, कितने बोगस डॉक्टर
चंद्रपुर-5, बल्लारपुर-0, भद्रावती-25, वरोरा-10, मूल-8, सावली-22, सिंदेवाही-4, नागभीड़-15, ब्रह्पुरी-11, गोंड़पिपरी-26, पोंभुर्णा-4, कोरपना-16, राजुरा-20 और चिमुर-23.

File Pic

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