Published On : Tue, Apr 29th, 2014

चंद्रपुर : अस्त-व्यस्त हुआ जिलाधिकारी कार्यालय


चंद्रपुर

अधिगृहीत की गई भूमि का मुआवजा देने के न्यायालय आदेश के बाद भी परियोजनाग्रस्त किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया, जिसकी वजह से न्यायालय ने सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय का सामान जब्त करने के आदेश दिए. इस आदेश के अनुसार आज कार्रवाई की गई. जिलाधिकारी कार्यालय के 1 लाख 60 हजार 300 रुपए का सामान जब्त किया है, जिसकी वजह से आज दिन भर जिलाधिकारी कार्यालय का कामकाम ठप पडा रहा. जिलाधिकारी के अनुस्थित होने से उनका कक्ष छोड.कर अन्य सामान परियोजनाग्रस्त किसान ले गए.
chadrapurचंद्रपुर, वर्धा तथा यवतमाल जिले के किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो इसलिए तीनों जिले के 900 किसानों की खेत जमीन सरकार ने 1999 के पूर्व अधिगृहीत की, लेकिन इन किसानों को अत्यल्प मुआवजा दिए जाने से कुछ किसानोंने न्यायालय की शरण ली. परियोजनाग्रस्त प्रदीप ताजने को 2 करोड. 83 लाख 57 हजार 794 मुआवजा देने का आदेश न्यायालय ने 31 अक्तूबर 2012 को दिया. आदेश देने के बाद भी सिंचाई विभाग, मध्यम परियोजना क्रमांक 1 व संबंधित अधिकारियों ने इस ओर अनदेखी कर परियोजनाग्रस्त किसानों को किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया, जिसकी वजह से ताजने ने पुन: न्यायालय में अपील की. इसके बाद न्यायालय ने 22 अप्रैल को जब्ती का आदेश फरमाया. इस आदेश का पालन कर किसान व न्यायालयीन कर्मचारी प्रथम भूसंपादन कार्यालय में गए. लेकिन वहां पर कोई प्रतिसाद न मिलने पर उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय का रुख किया. किंतु इस समय जिलाधीश कार्यालय में अनुपस्थित थे. इस समय अतिरिक्त जिलाधिकारी सी.एस. डहालकर से चर्चा की गई, लेकिन समाधान नहीं होने से जब्ती की कार्रवाई शुरू की गई. जिलाधिकारी के मुख्य सहायक का कम्प्यूटर, टेबल व कुर्सियां जब्त की गई. इसके बाद विविध विभाग के कम्प्यूटर, टेबल तथा अन्य सामान भी जब्त किए गए. शाम 5 बजे तक 1 लाख 60 हजार 300 रुपए का सामान जब्त किया गया. इस कार्रवाई की वजह से आज दोपहर 3 बजे से जिलाधिकारी कार्यालय के कई विभागों का कामकाज ठप पड गया.

सरकार ने इसके पूर्व ही परियोजनाग्रस्तों किसानों की ओर ध्यान दिया होता तो जब्ती की बदनामी को टाला जा सकता था. आज परियोजनाग्रस्त किसानों को किसी भी प्रकार का आश्‍वासन नहीं दिए जाने से यह कार्रवाई की गई. कार्रवाई के दौरान जिलाधिकारी समेत कार्यालय के अधिकांश अधिकारी अनुपस्थित थे. जबकि कार्यालय अस्तव्यस्त हो गया था. महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आने वाले नागरिकों को इस समय काफी परेशानी का सामना करना पडा.