Published On : Thu, Feb 20th, 2014

चंद्रपुर: अंध विद्यालय की दयनीय अवस्था, टुकड़ो में दी जाती है अनुदान की रकम


राज्य में निरक्षरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार के आदेश पर राज्य सरकार की ओर से कई उपक्रम चलाये जा रहे हैं। लेकिन यही राज्य सरकार अंध विद्यार्थियों को लेकर उदासीन नज़र आ रही है। राज्य  दो नहीं बल्कि ११३ संस्थाओं कि ओर से अंध विद्यालय चलाये जा रहे हैं। लेकिन इन विद्यार्थियों के पालन पोषण के लिए सरकार की ओर से मंजुर रकम को इनके पास पहुचने में अगर चार साल से भी जादा का वक़्त लगे तो संचालक के साथ – साथ ये विद्यार्थी भी किस की शरण में जाएँ ये सवाल पैदा हो रहा है। 

इन अंध विद्यालयों के हर विद्यार्थी के लिए प्रति महीने के अनुसार अनुदान घोषित की गयी है। लेकिन घोषित राशि को पाने के लिए संचालको को काफी कसरत करनी पड़ती है।  गौरतलब है की २००९ तक संचालको को नियमित अनुदान मिलता रहा लेकिन २००९ के बाद रकम मिलना मुश्किल हो गया।

चंद्रपुर जिले में अंध मित्रो ने शुरू किए प्रेरणा अंध विद्यालय और आनंदवन अंध विद्यालय अंध विद्यार्थियो के जीवन में प्रकाश निर्माण करने के लिए मह्त्वपुर्ण कार्य कर रहे है। सरकार ने प्रेरणा अंध विद्यालय को २०१० व २०११ इस आर्थिक वर्ष के लिए ४० विद्यार्थीयों के लिए ४ लाख ७२ हजार रुपये का अनुदान मंजूर किया था । सरकार के लिए ये रकम बहुत बडी नही, लेकिन इतनी सी रकम भी सरकार के तरफ से तिन हिस्सो में विद्यालय को दी गयी। रकम मंजुर होने के बाद पहिले हप्ते में १ लाख रुपये , दूसरे हप्ते में ढ़ाई लाख रूपये देने में आये ,तीसरा  हप्ता जनवरी २०१४ में निर्गामीत करने में आया।  सरकार इसी प्रकार रकम मंजूर करेगी तो विद्यालय को चलाये तो कैसे चलाये ऐसा प्रश्न विद्यालय के संचालक के सामने खड़ा है।

ऐसी ही स्थिती आनंदवन के विद्यालय की देखी जा सकती है। पिछले ३ साल से सरकार की तरफ विद्यालय के अनुदान के १५ से २० लाख रूपये उर्वरित है। अभी – अभी २०१० की पुरी रकम विद्यालय को मिली लेकिन उर्वरित वर्ष की रकम मिलेगी कब ? ऐसा प्रश्न विद्यालय के संचालको कों पड़ा है। इसी लिए जनप्रतिनिधी इस विषय की तरफ ध्यान दे ऐसी मांग जोर पकड़ रही है।

सरकार के तरफ से अंध विद्यार्थियों कों दिए जाने वाले अनुदान अत्यल्प है। २०१२ तक ये अनुदान ६०० रु. प्रति विद्यार्थी प्रतिमाह था इसके बाद अनुदान ९०० रु. किया गया. २०१२ के बाद महंगाई बढ़ी. इसी स्थिति में अनुदान स्कूल चलाने में कमी पड रही है। वहीं मंजूर हुई अनुदान की राशी को मिलने में चार – चार वर्ष का समय लग जाता है। ये परीक्षण करते समय इस के लिए सिर्फ ५०० रु. मंजूर किये गए है। मात्र परीक्षण के लिए १० से १५ हजार गिनने पड़ते है। ये अतिरिक्त दंड संचालकों को सहन करना पड़ता है। सरकार मंजूर अनुदान समय पर दे , व महंगाई की तुलना में अनुदान की रकम बढाने की मांग प्रेरणा विद्यालय के संचालक सचिव एस.आर. ताकसांडे इन्होने की है।

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