Published On : Thu, May 1st, 2014

गोंदिया : गोंदिया जिले में जंगल में कहर ढाने लगी आग


दो माह में ही लाखों का नुकसान, 15 हेक्टेयर वन – भूमि चपेट में

गोंदिया

गर्मी बढ़ने के साथ ही एक तरफ तो जंगलों के जलस्रोत समाप्त होने लगते हैं, वहीं मार्च से ही गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ने लगती हैं. कुछ स्थानों पर जहां आग स्वाभाविक रूप से लगती है, वहीं कुछ में विशिष्ट उद्देश्यों के तहत आग लगाई जाती है. लेकिन ऐसी आग से लाखों रुपयों की वन-संपत्ति जरूर नष्ट हो जाती है. हालांकि इस पर नियंत्रण के लिए वन विभाग प्रयास भी करता है, लेकिन वन विभाग के प्रयास अक्सर नाकाफी साबित होते हैं. इस बार मार्च तक गोंदिया जिले में 15 हेक्टेयर वन-क्षेत्र में लगी आग में लाखों की वन-संपदा जलकर ख़ाक हो चुकी है.

इस दफा अप्रैल माह से ही धूप चटकने लगी है और पारा बढकर 41 डिग्री पर पहुंच गया है. ग्रीष्मकाल में जंगलों में बांस में होने वाले घर्षण से चिंगारियां निकलती हैं और आग लगती है. अनेक दफा कुछ लोग तेंदू पत्ता के लिए भी वृक्षों में आग लगाते रहते हैं, परंतु ये आग उग्र रूप धारण कर लेती है और इसमें वन-संपत्ति के साथ ही वन्य जीवों को भी नुकसान पहुंचता है.

692 हेक्टेयर वन जमीन आग की चपेट में
इस संबंध में वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2012-2013 में 172 प्रकरणों में 692 हेक्टेयर वन जमीन आग की चपेट में आई, जिसमें लाखों की वन-संपत्ति जलकर खाक हो गई. इसमें प्रमुख रूप से गोरेगांव वनक्षेत्र में 28 हेक्टेयर वन-जमीन, देवरी वन क्षेत्र में 28.25 हेक्टेयर, देवरी उत्तर-दक्षिण में 4 हेक्टेयर, चिचगड वनक्षेत्र की 14 हेक्टेयर, सडक-अर्जुनी वनक्षेत्र के अंतर्गत 6 हेक्टेयर, नवेगांव बांध क्षेत्र में 10.25 हेक्टेयर और अर्जुनी-मोरगांव क्षेत्र में 10.25 हेक्टेयर वन क्षेत्र में आग लगने से भारी नुकसान हुआ है .


दो माह में ही बड़ा इलाका खाक
उपवनसंरक्षक रामाराव ने बताया कि वर्ष 2014 में फरवरी और मार्च के दो महीनों में तिरोडा वनक्षेत्र के तहत 2 हेक्टेयर वन-जमीन पर, चिचगड में 2 हेक्टेयर, नवेगांव बांध में 5.10 हेक्टेयर, देवरी में 2 हेक्टेयर, गोंदिया में 1.50 हेक्टेयर और सालेकसा वनक्षेत्र के अंतर्गत 2 हेक्टेयर मिलाकर कुल 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की भेंट चढ़ गए. उन्होंने बताया कि इस दफा आग पर नियंत्रण पाने के लिए वन विभाग भी कमर कसकर तैयार है.

Representational Pic

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फायर वॉचर की नियुक्ति
रामाराव के अनुसार जिले में कुल 12 रेंज हैं और एक रेंज में 4 के हिसाब से 48 फायर वॉचर की नियुक्ति की गई है. इन फायर वॉचर के तहत वन मजदूरों के माध्यम से आग पर नियंत्रण पाने का काम किया झा रहा है. जंगल में लगने वाली आग पर क़ाबू पाने के लिए प्रत्येक रेंज क़ो एक के हिसाब से 12 चौपहिया वाहन उपलब्ध कराए गए हैं. इतना ही नहीं, जिले के सभी परिक्षेत्रों के लिए 8 लाख 66 हजार की निधि का वितरण किया गया है. आग पर नियंत्रण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों को दे दी गई है. नवेगाव बांध वन परिक्षेत्र में फायर इंजिन व गोरेगांव उपवनपरिक्षेत्र में पानी का टैंकर इस्तेमाल किया जा रहा है.

बड़ी आग पर नियंत्रण के लिए ‘फायर ब्लोअर’
उपवनसंरक्षक ने बताया कि आग लगने के बाद उसका स्वरूप कभी – कभी बहुत व्यापक, उग्र और भयंकर हो जाता है. इस अवस्था में आग पर नियंत्रण के लिए प्राथमिक उपाय काम नहीं करते. ऐसे में फायर ब्लोअर इंजिन के माध्यम से आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जाती है. जिले में फिलहाल एक फायर ब्लोअर इंजिन ऱखा गया है और वह नवेगांव बांध में अपनी सेवाएं दे रहा है.