Published On : Sat, Jul 19th, 2014

गोंदिया : अंधेरे घरों को रोशन करने दे दी बंद सौर कंदीलें

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गोंदिया जिला परिषद में लाखों का सौर कंदील घोटाला


अधिकारियों, पदाधिकारियों की मिलीभगत का आरोप


गोंदिया


गोंदिया जिला परिषद के महिला व बाल कल्याण विभाग द्वारा आदिवासियों, एससी और विशेष घटक वर्ग के लोगों के लिए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत ऐसी सौर कंदीलों का वितरण किया गया, जो बंद थीं. परिणामस्वरूप सभी ने इन कंदीलों को विभाग को वापस कर दिया है. लाखों रुपयों का यह घोटाला अधिकारियों और पदाधिकारियों की मिलीभगत से किया गया और सरकार को लाखों की चपत लगा दी गई.

आपूर्तिकर्ताओं के ‘अच्छे दिन’
प्राप्त जानकारी के अनुसार महिला और बाल कल्याण विभाग द्वारा आदिवासी उपाय योजना, सर्वसाधारण और विशेष घटक योजना के अंतर्गत सौर कंदीलों के वितरण के लिए वर्ष 2013-14 में 11 लाख 76 हजार 920 रुपयों की निविदा निकाली गई थी. मगर निविदाओं को मैनेज कर लिया गया और आपूर्तिकर्ताओं के ‘अच्छे दिन’ आ गए. उन्होंने बंद सौर कंदीलों की आपूर्ति कर दी.

सरकार की योजना
आदिवासी, अनुसूचित जाति, विशेष घटक आदि जाति-वर्ग के लोगों के अंधेरे घरों को प्रकाशित करने के लिए सौर कंदीलें उपलब्ध कराने की सरकार की योजना है. मगर उसमें पलीता लगाने का काम प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी और पदाधिकारी मिलकर कर रहे हैं.

निविदा जारी, बिल मंजूर
इस योजना के तहत महिला और बाल कल्याण विभाग ने लाभार्थियों से 10 फीसदी राशि वसूल की थी. इसके लिए निविदा भी जारी की गई. गोंदिया बाल प्रकल्प विभाग 1 व 2 के लिए 14 कंदीलें, तिरोड़ा 8, आमगांव 10, गोरेगांव 8, सालेकसा 7, सड़क अर्जुनी 6, अर्जुनी मोरगांव 9 और देवरी के लिए 9 कंदीलें मिलाकर कुल 71 सौर कंदीलों के लिए प्रति नग 3 हजार रुपए के हिसाब से 1 लाख 91 हजार 600 रुपए के बिल मंजूर किए गए. उसी तरह विशेष घटक योजना के तहत प्रकल्प गोंदिया 1 व 2 के लिए 40 कंदीलें, तिरोड़ा 23, आमगांव 21, गोरेगांव 21, सालेकसा 13, सड़क अर्जुनी 23, अर्जुनी मोरगांव 17 और देवरी के लिए 21 कंदीलें मिलाकर कुल 179 सौर कंदीलों के लिए प्रति नग 3000 रुपए के हिसाब से 5 लाख 37 हजार का बिल मंजूर किया गया. सर्वसाधारण योजना के अंतर्गत गोंदिया बाल प्रकल्प विभाग 1 व 2 के लिए 43 कंदीलें, तिरोड़ा 24, आमगांव 23, गोरेगांव 23, सालेकसा 16, सड़क अर्जुनी 19, अर्जुनी मोरगांव 24 और देवरी के लिए 22 कंदीलें मिलाकर कुल 114 सौर कंदीलों के लिए प्रति नग 2240 रुपए के हिसाब से 4 लाख 42 हजार 320 रुपए के बिल मंजूर किए गए.

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शतों और नियमों को बताई धता
सौर कंदीलों की आपूर्ति के लिए जिला परिषद ने नागपुर और पुणे की कंपनियों को चुना. उन्हीं के नाम की निविदा भी निकाली गई. 11 फरवरी 2014 और 3 मार्च 2014 को सौर कंदीलों की आपूर्ति का पत्र भी जारी कर दिया गया. मगर शर्तों को धता बताकर सौर कंदीलों की आपूर्ति स्वीकार की गई और लाभार्थियों को बांटी भी गई. लाभार्थियों ने लागत का 10 प्रतिशत हिस्सा देकर सौर कंदीलें खरीदी, इस उम्मीद में कि अब उनके घर रोशन हो जाएंगे. मगर ये क्या? कंदीलें तो किसी काम की नहीं थीं. वे तो बंद निकलीं. शुरू ही नहीं हुर्इं.

शिकायत पर भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
लाभार्थियों ने इसकी शिकायत प्रकल्प अधिकारियों से की. कंदीलों की मरम्मत कराने की कोशिश भी की, मगर कंदीलों को चालू होना नहीं था और वे हुई भी नहीं. अब देखना यह है कि बंद कंदीलों की आपूर्ति करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हो पाती है?

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