Published On : Wed, Apr 23rd, 2014

खामगांव: भेंडवल में 2 मई को होगी भविष्यवाणियां

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300 वर्ष पुरानी परंपरा, 15 हजार किसान जुटेंगे इस बार

खामगांव.

इस साल बारिश कैसी होगी ? अतिवृष्टि होगी कि सूखा पड़ेगा ? फसलों की स्थिति कैसी होगी ? पृथ्वी के लिए कोई खतरा तो नहीं है ? देश की आर्थिक स्थिति, रक्षा क्षेत्र की हालत क्या होगी और राजा की गद्दी टिकेगी अथवा नहीं ? देश को दुश्मन से कोई खतरा तो नहीं है ? प्राकृतिक संकटों से देश को क्या नुकसान होगा ?
ये और ऐसे ही दर्जनों सवालों के जवाब आगामी 2 मई को अक्षय तृत्तीया के मौके पर होने वाले “भेंडवल की घटमांडणी” कार्यक्रम में मिल जाएंगे. कार्यक्रम में आगामी मौसम में कृषि क्षेत्र से
संबंधित समस्याओं और फसलों-बारिश के साथ ही देश की राजनीतिक व आर्थिक परिस्थितियों का अनुमान लगाया जाता है. यह कार्यक्रम विदर्भ सहित पूरे महाराष्ट्र में मशहूर है. हर साल होने वाला यह कार्यक्रम इस साल 2 मई को अक्षय तृत्तीया के शुभ मुहूर्त पर हो रहा है. किसानों की नजर इस साल की भविष्यवाणियों पर लगी हुई हैं.

300 वर्षों से जारी परंपरा
जलगांव जामोद तालुका में पूर्णा नदी के तट पर बसे ग्राम भेंडवल में पिछले 300 वर्षों से घटमांडणी की परंपरा जारी है. वाघ परिवार की इस परंपरा को 300 साल पहले चंद्रभान महाराज वाघ ने प्रारंभ किया था. कहा जाता है कि वे निलावती विद्या के प्रकांड पंडित थे. आज भी वाघ परिवार इस परंपरा को चला रहा है. किसानों का इस परंपरा पर गहरा विश्वास है. विदर्भ का किसान इस घटमांडणी में की जानेवाली भविष्यवाणियों पर बारीकी से नजर रखे रहता है.
घटमांडणी में की जाने वाली भविष्यवाणियां पिछले अनेक वर्षों से सही साबित होती आई हैं. आज भी किसानों की फसल और बारिश के संबंध में भविष्य का आधार यही भविष्यवाणियां होती हैं और उनका विश्वास है कि ये सच ही होती हैं.

कैसे होती है घटमांडणी
अक्षय तृत्तीया के दिन सूर्यास्त से पहले गांव के बाहर एक खेत में पुंजाजी महाराज वाघ विभिन्न वस्तुअों की स्थापना (घट-स्थापना) करते हैं. इसके तहत 18 अनाज रखे जाते हैं. इसमें गेहूं, ज्वार, तुअर, उड़द, मूंग, चना, जवस, तिल, भादली (एक खाद्य), करडी (तिलहन का एक प्रकार), मसूर, बाजरा, चावल, अंबाडी (एक प्रकार की भाजी), सरकी और बटाना गोलाकार रखे जाते हैं.
इन वस्तुअों को गोलाकार रखने के बाद वस्तुओं के बीच में एक गहरा गड्ढा बनाकर उसमें बारिश के चार महीनों के प्रतीक के रूप में मिट्टी के चार ढेले रखे जाते हैं. उस पर पानी से भरी गागर, गागर के ऊपर पापड, भजिया, वड़ा, सांडोली (एक महाराष्ट्रियन खाद्य पदार्थ), कुरडी (एक महाराष्ट्रियन खाद्य पदार्थ) रखे जाते हैं, जबकि नीचे पान के बीड़े में सुपारी रखी जाती है.
दूसरे दिन सूर्योदय के पूर्व इन सारी करीने से सजाई गई वस्तुओं में हुए बदलाव के आधार पर चालू मौसम की फसलों और पानी के साथ ही देश की आर्थिक, राजनीतिक घटनाओं की भविष्यवाणियां की जाती हैं. अब तक तो भविष्यवाणियां वयोवृध्द रामदास महाराज वाघ किया करते थे. कुछ माह पूर्व उनका निधन हो चुका है. इसलिए इस बार भविष्यवाणी उनके उत्तराधिकारी उनके पुत्र पुंजाजी महाराज वाघ करेंगे. अनुभवी सारंगधर महाराज वाघ उनकी सहायता करेंगे. इन भविष्यवाणियों के बाद ही किसान तय करेंगे कि किस फसल को प्राथमिकता दी जाए.

पशु-पक्षियों की बोली समझते थे चंद्रभान महाराज
पशु-पक्षियों की बोली समझने वाले चंद्रभान महाराज के बारे में कहा जाता है कि वे भविष्य को देख लिया करते थे. भेंडवल का वाघ परिवार उसी परंपरा का आज तक जतन कर रहा है. उल्लेखनीय है कि गुढीपाडवा के अवसर पर भी वस्तुएं स्थापित की जाती हैं, मगर मुख्य स्थापना अक्षय तृत्तीया पर ही की जाती है. दोनों स्थापनाओं में समानता होती है. दोनों स्थापनाओं के निष्कर्षों को मिलाकर ही पुंजाजी महाराज इस दफा की भविष्यवाणी करेंगे.

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जुटते हैं 10 से 15 हजार किसान
इन भविष्यवाणियों को सुनने के लिए 10 से 15 हजार किसान यहां जमा होते हैं. लोग अक्षय तृत्तीया की रात में ही यहां पहुंच जाते हैं और रात भर ठहरने के बाद सुबह स्थापनाओं की भविष्यवाणी सुनने के बाद ही लौटते है. विदर्भवासियों की नजरें इस बार भी इसी तरफ लगी हुई हैं.

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