Published On : Thu, Apr 24th, 2014

खामगांव: ओवरटेक से बढ़ता दुर्घटनाओं का खतरा

एसटी बसों से घिरे रहते हैं महामार्ग, न इंडिकेटर का नियमित इस्तेमाल और न नियमों की परवाह 

खामगांव: सड़कों पर ओवरटेक कर हर किसी को पीछे छोड़ने और आगे बढ़ने का प्रमाण तेजी से बढ़ता जा रहा है. खासकर युवा वर्ग इस मामले में सबसे आगे है. इस ट्रेंड में एस.टी. बसें और उसके चालक भी पीछे नहीं हैं. राष्ट्रीय महामार्ग पर निजी वाहनों को ओवरटेक करने की कोशिश में एस.टी. बसों के चालक न सिर्फ यातायात नियमों की खिल्ली उड़ाते प्रतीत होते हैं, बल्कि उनकी वजह से यातायात में बाधा भी पैदा होती है. शहरों में कई दफा तो एसटी के चालक ओवरटेक करने के प्रयास में एक्सीडेंट तक कर बैठते हैं. ओवरटेक करने की कोशिश में वे यह भी भूल जाते हैं कि उन पर कई लोगों की जिम्मेदारी भी है. 

जहां गांव, वहां एसटी 
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में यात्रा की एक सार्वजनिक और सुरक्षित यातायात व्यवस्था के रूप में एसटी की पहचान
है. प्रचलित कहावत भी है – जहां गांव, वहां रास्ता और वहां एसटी. आज ग्रामीण भागों में एकदम एक छोर पर बसे गांव तक भी एसटी की पहुंच है. विद्यार्थियों को पास की सुविधा, वयोवृध्द और विकलांग लोगों को किराए में विशेष छूट के साथ ही निजी बस सेवा की तुलना में वाजबी किराए के लिए भी एसटी को जाना जाता है. यह अकारण नहीं है कि आज निजी वाहनों की बढ़ती संख्या और उनकी रेलमपेल के बावजूद लोग घंटों एसटी बस स्टैंड पर बसों की बाट जोहते बैठे रहते हैं.
चालकों को यातायात के नियम सिखाने की जरूरत
अब लगता है कि एस.टी. चालकों को यातायात के नियम सिखाने की जरूरत आन पड़ी है. एक सर्वे में यह बात खुलकर सामने आई है. लोगों की तरफ से भी इस आशय की मांगें की जाने लगी हैं. शहरी महामार्ग में तो निजी वाहनों से जानलेवा स्पर्धा और उनको पीछे छोड़ने की कोशिश में एसटी चालक दुर्घटना का शिकार भी बन जाते हैं. इससे यातायात अस्तव्यस्त होता है, सो अलग.

इंडिकेटर का उपयोग तक नहीं 

दरअसल खामगांव शहर में दाखिल होते समय और बायपास से चिखली, बुलढाना की ओर जाने के लिए चालक को इंडिकेटर का इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन बालापुर बायपास से एसटी मोड़ते समय एस.टी.चालक इंडिकेटर का उपयोग करते दिखाई नहीं देते. दरअसल किसी भी मार्ग पर गाड़ी को मोड़ते समय पीछे से आनेवाले वाहनों को संकेत देने के लिए ही वाहनों में इंडिकेटर लगाए जाते हैं, मगर आलसी एस.टी. चालक उसका उपयोग भी नहीं करते. जबकि इंडिकेटर का नियमित उपयोग करना जरूरी होता है.

बस स्टैंड पर भीड़ 
खामगांव  बस स्टैंड पर चारों तरफ से यातायात चलता रहता है. बस स्टैंड पर आने-जाने वाली
बसें यात्रियों के लिए कुछ देर तक खड़ी की जाती हैं. इससे भारी आवागमन होता रहता है. बसों से यात्रियों के उतरते और चढ़ते समय भारी गड़बड़ी होती रहती है. इस भागदौड़ और गड़बड़ी में फंसकर गाडीचालकों के दुर्घटना का शिकार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. अभी पिछले हफ्ते ही बस स्टैंड पर खड़ी एक एस.टी. बस को एक कार ने पीछे से टक्कर मार दी थी.

स्पीड से भागते वाहन 

निजी वाहनों की गर्दी होने के कारण यात्रियों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वाहन चालक नियमों की परवाह किए बगैर वाहनों को स्पीड से भगाते रहते हैं. इस स्पर्धा में कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, मगर किसी को इसकी फ़िक्र नहीं है. अभी मंगलवार की सुबह ही तेजी से भाग रही बस के चालक की लापरवाही के कारण दुर्घटना हो चुकी है. सड़क पर ओवरटेक करते समय सड़क के दोनों बाजू बंद हो जाते हैं. इसका भान भी चालकों को रखना चाहिए. इससे छोटे वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बस चालक महामार्ग पर पूरा रास्ता घेरे रहते हैं. इसके चलते दूसरे वाहनों को आने- जाने के लिए जगह ही नहीं बचती.