Published On : Sat, Jul 26th, 2014

उमरखेड़ : बारिश थमी तो किसानों की चिंता बढ़ गई

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बुआई फिर संकट में, हरिनाम सप्ताह और महाप्रसाद शुरू


उमरखेड़ तालुका को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग


उमरखेड़

दो दिन बरसने के बाद थमी बारिश ने फिर किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है. इससे तालुका में की गई बुआई फिर एक बार संकट में घिरती नजर आ रही है. ग्रामीणों ने प्रकृति के मिजाज को शांत करने के लिए अखंड हरिनाम सप्ताह, महाप्रसाद और देवता के दरबार में अनशन जैसे रास्ते अपनाने शुरू कर दिए हैं. सब केवल वरुण देवता को खुश करने के लिए किया जा रहा है.

फिर हताशा
बारिश का मौसम शुरू होने के बाद डेढ़ माह के अंतराल में बदरा कुछ इलाकों में बरसे तो 25 प्रतिशत किसानों ने बुआई कर दी. फिर कुछ दिनों के विश्राम के बाद बादल 21 जुलाई से दो दिन तक लगातार बरसे तो किसानों की उम्मीदों को पंख लग गए. 23 जुलाई को पूरे तालुका में बुआई कर ली गई. लेकिन 24 जुलाई से सूर्य फिर बादलों के बीच में से निकल आया और किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया.

अर्थव्यवस्था चौपट, बाजार सूने
पहले ही खाद और बीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होने और पिछले साल की अतिवृष्टि से परेशान और तंगहाल किसानों को कुछ सूझ नहीं रहा है कि आखिर करें तो क्या करें. खेती-किसानी पर आधारित तालुका की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है. बाजार सूने पड़े हैं. कहीं उत्साह का नाम नहीं है.

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किसानों को आधार देने की मांग
उमरखेड़ की जनता चाहती है कि तालुका को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया जाए, मगर विधानसभा चुनाव नजदीक आने के चलते जनप्रतिनिधि विभिन्न कार्यक्रमों में व्यस्त हैं. प्रशासन बस कागजी घोड़े दौड़ाने में ही लगा है. इससे किसानों का मनोबल खच्ची हो गया है. ऐसे में किसानों को आधार देने की मांग जोर पकड़ने लगी है.

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