Published On : Sun, Jun 22nd, 2014

उत्तर नागपुर : नितिन के खिलाफ भाजपा उम्मीदवारों में सफेलकर प्रबल दावेदार

उत्तर नागपुर में विधायक राऊत के खिलाफ पनपता विरोध भाजपा कार्यकर्ता सह जनता भ्रम में सफेलकर कही डमी उम्मीदवार तो नहीं ?
Nitin-Rautनागपुर टुडे 

जब से कांग्रेस नेता नितिन राऊत ने उत्तर नागपुर की राजनीति में प्रमुखता से उभर कर आये है तब से पक्ष-विपक्ष में कोई नया सक्षम नेतृत्व पनप नहीं पाया ,मानो बरगद का वृक्ष हो.बरगद के वृक्ष के नीचे कोई भी पौधा ठीक से फलफूल नहीं पाता है.इसलिए राऊत लगातार विधानसभा चुनाव आसानी से जीतते आये,इस दफे कहने को नया प्रयोग किया जाने वाला है ,यह तो वक़्त ही बताएगा कि विपक्ष का प्रयोग नाम का था की काम का ? संभवतः नितिन के  खिलाफ भाजपा आज की सूरत में कामठी के भाजपा पार्षद रणजीत सफेलकर को उतारने की योजना बना रही है.

लोकसभा चुनाव में चर्चित रहे उत्तर नागपुर के विधायक नितिन राऊत इस चुनावी क्षेत्र से लगातार ३ दफे विधानसभा चुनाव बड़े आसानी से जीत गए.अधिकांश वक़्त भाजपा ने बाहरी उम्मीदवार उतारा,फिर चाहे नाना शामकुले हो या फिर राजेश तांबे। जिस वजह से उत्तर नागपुर के मतदाता बाहरी उम्मीदवार को प्राथमिकता देने की बजाय स्थानीय उम्मीदवार को अवसर प्रदान करते रहे.पहली बार राज्यमंत्री बने तो एक विशेष तपके को अपने बहुत ही निकट किया। दूसरे दफे कैबिनेट मंत्री बने तो संपत्ति बनाने पर जोर दिया। कभी फ़िल्मी दुनिया के क्षेत्र में तो कभी विवादस्पद सम्पति खरीदने में अक्सर अपने इर्द-गिर्द रहने वाले प्यादों की वजह से चर्चे में रहे.लेकिन कभी अपने हाथों किसी को राजनैतिक रूप से पनपने नहीं दिया। इस चुनाव में उन्हें घर बैठाने हेतु पक्ष-विपक्ष के सभी आतुर है.

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नितिन के लिए नितिन बनते रहे ढाल

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कांग्रेसी नितिन को राजनीति में बनाये रखने के लिए तय समझौते के तहत भाजपाई नितिन हमेशा से साथ देते रहे,नतीजतन कभी मुँह की खानी नहीं पड़ी.भाजपा ने भी कभी स्थानीय उम्मीदवार को तहरीज़ नहीं दी,मेहनत सभी से उम्मीदवार बनाने के नाम पर ली,अंतिम समय में बाहरी उम्मीदवार थोप स्थानीय इच्छुकों की हवा निकाल देते रहे.आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा पुरानी कहानी दोहराकर कांग्रेसी नितिन की जीत को चौथी दफे विधानसभा पहुँचने का मार्ग प्रसस्त करती है या फिर ……!

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चयनित इच्छुकों की बनी सूची

इस दफे भी भाजपा टिकट के दावेदार पहली सूची में संदीप गवई और रणजीत सफेलकर बाहरी है.पहली सूची में स्थानीय इच्छुक मिलिंद माने है.दूसरी सूची में रमेश वानखेड़े ,बबली मेश्राम आदि है.गवई हारा खिलाडी है,इस पर भाजपा जुआ मज़बूरी में खेल सकती है.मिलिंद माने गैरभाजपाई है,भाजपाई कार्यकर्ता मज़बूरी में ताक़त झोंकेंगे।रमेश वानखेड़े विवादस्पद छवि के लिए मशहूर है,इनमें विधायक बनने के कोई गुण नहीं है और बबली मेश्राम पर सिर्फ चर्चा है कोई सीरियस नहीं है. अब ले दे कर रणजीत सफेलकर ही बचा जिस पर भाजपा गंभीर नज़र आ रही है,सफेलकर का नाम विधायक चंद्रशेखर बावनकुले सह शहर भाजपा के पदाधिकारी बागड़ी चला रहे है.सफेलकर का नेटवर्क काफी टेड़ा-मेढ़ा है,यानि जो इसका है वह कही कांग्रेस तो कही भाजपा तो कही किसी और के भी है.

सफेलकर के समर्थक राऊत विरोधी

सफेलकर समर्थक मिक्की बक्शी,विकास ठाकरे,विधायक केदार,विधायक चंद्रशेखर ,शिवसेना नेता जाधव आदि प्रमुख है.राजू समर्थक नगरसेवक सह अन्य कार्यकर्ता राऊत के कट्टर विरोधियों में शुमार है.वैसे सफेलकर व नितिन राऊत की दोस्ती भी जगजाहिर है,एक दूसरे के घर-कार्यक्रमों में आना जाना है.सबसे बड़ी बात यह है जो किसी को हज़म नहीं हो रहा है कि सफेलकर विधानसभा चुनाव में नितिन के खिलाफ वाकई खड़ा होगे या खड़ा करवाकर बलि का बकरा बना दिया जायेगा। पिछले चुनावो का इतिहास देखा जाये तो भाजपा नेता ने आजतक कांग्रेसी नितिन के लिए ऐसा ही कुछ करते आई है.अब देखना यह है कि वाकई सफेलकर पर भाजपा विश्वास रख चुनावी जंग में खुदती है या फिर सभी इच्छुकों  ग्राउंड तैयार कर किसी अन्य को उम्मीदवारी देती है.

बहरहाल कांग्रेसी उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले भाजपा उम्मीदवार को उत्तर नागपुर का बाहरी इलाके  रहने वाले मतदाता,उत्तर भारतीय हिंदी भाषी मतदाता को अपनी ओर आकर्षित करना होगा जो की आजतक चुनावों से दूर रहे है,उत्तर नागपुर बहुत फ़ैल गया है,इनके पास आजतक प्रत्यक्ष रूप से उम्मीदवार पहुँच नहीं पाये,इसलिए आजतक सरकारी सुविधाओ  वंचित है.

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