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    Published On : Thu, Jan 14th, 2021

    मनपा में सत्ता प्राप्ति के लिए करेगी बर्खास्त ?

    – MVA की भाजपा के खिलाफ नई रणनीति


    नागपुर : केंद्र सरकार की भाँति नागपुर मनपा में लगभग पिछले डेढ़ दशक से भाजपा का एकतरफा राज हैं.इस बीच राज्य में पिछली सरकार भाजपा गठबंधन की थी,तब भाजपा की और बल्ले-बल्ले हो गई थी.चूँकि गत विधानसभा चुनाव बाद भाजपा-सेना का गठबंधन टुटा,इसलिए भाजपा को जमीन पर लाने के लिए राज्य की MVA सरकार दिल्ली से लेकर गल्ली तक नए-नए हथकंडे अपना रही,इस क्रम में MVA का अगले 6 माह के भीतर NAGPUR NMC को बर्खास्त कर सकती हैं,अगर ऐसा हुआ तो अगला मनपा चुनाव भी समय पूर्व होने की संभावना हैं.

    मनपा में पिछले 3 टर्म से भाजपा बहुमत से राज कर रही हैं,बहुमत होने के कारण विपक्ष के चुनिंदे नगरसेवकों को पक्ष में लेकर मनमाफिक निर्णय लेती रही,केंद्र और राज्य सरकार के मदद से कई प्रकल्प शहर में शुरू किये गए,जिसमें मनपा का भी शेयर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर दिया गया.कुछेक निर्णय ऐसे भी लिए गए जो न पक्ष और न विपक्ष को हजम हुआ,क्यूंकि बहुमत था,इसलिए कानूनन सही ठहराया गया.यह कांग्रेस,एनसीपी,बीएसपी,शिवसेना को हजम नहीं हो रहा था.

    पिछले वर्ष राज्य में विधानसभा चुनाव हुए,सबसे बड़ी पार्टी भाजपा जरूर रही,लेकिन भाजपा नेतृत्वकर्ता के अड़ियल रवैय्ये के कारण उनकी सहयोगी पार्टी शिवसेना उनसे अलग हो गई.इधर एनसीपी सुप्रीमो ने मौका देख शिवसेना सुप्रीमो को ‘गोल्डन चांस’ का लुभावनी चाल खेल उन्हें ही मुख्यमंत्री बनने की सलाह दी,उनकी बातों में आकर सेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन बनी.इस गठबंधन के कारण भाजपा के ‘मुँह से निवाला छीन गया’.इसके बाद राज्य में पुनः सत्ता प्राप्ति के लिए आजतक केंद्र से नाना प्रकार के हथकंडे अपनाये जा रहे.

    इस क्रम में MVA का अगला निशाना नागपुर मनपा ही हैं.वैसे वर्ष 2020 के पहले माह से ही MVA ने मनपा पर सत्ताधारी भाजपा की नकेल कसना शुरू कर दिया था.जनवरी2020 के आखिर माह में MVA ने नागपुर मनपा का आयुक्त बदलकर विवादास्पद IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को मनपा का नया आयुक्त नियुक्त किया,उन्हें जिस काम के लिए नागपुर मनपा भेजा गया था,मुंढे वह काम छोड़ खुद की पब्लिसिटी बटोरने के साथ नाना प्रकार के गैरकानूनी कामों में लीन हो गया ,नतीजा राज्य सरकार को अगले 6 माह के अंदर मुंढे को नागपुर मनपा से हटाना पड़ा.इसके बाद आनन्-फानन में राज्य सरकार ने कुछ वैसा ही अधिकारी राधाकृष्णन बी को मनपा का नया आयुक्त नियुक्त किया।

    इस अधिकारी के कामकाज से अबतक ऐसा प्रतीत हुआ कि यह कर्मठ और सकारात्मक सोच वाला हैं.लेकिन इसकी नकेल MVA के तथाकथित नेताओं ने कस रखी हैं.इसके बावजूद इन्होने कई ऐसे काम/पहल किये जिससे सभी नगरसेवक/अधिकारी/कर्मी/जनता प्रभावित हैं.

    इसके बावजूद इनके हाथों से ऐसे काम करवाए जा रहे,जिससे यह आभास करवाया जा रहे कि मनपा नागपुर को आर्थिक संकट में हैं,बर्खास्त करने का प्रयास MVA द्वारा हो रही हैं.

    MVA को ऐसा लग रहा कि मनपा को समय पूर्व बर्खास्त करने और समय पूर्व मनपा चुनाव लेने से MVA को काफी फायदा हो सकता हैं,इनका सपना तो यह हैं कि नागपुर मनपा पर इनकी सत्ता आए.इसके लिए अबतक तय वार्ड निहाय मनपा चुनाव को बदलने की योजना पर विचार किया जा रहा.इस क्रम में वार्ड निहाय या फिर 2-2 नगरसेवकों का प्रभाग बनाने पर विचार चल रहा,2-2 नगरसेवकों का प्रभाग से 50% महिला के साथ 1 कांग्रेस के साथ दूसरा शिवसेना या फिर एनसीपी या फिर अन्य सहयोगी गुट को बतौर उम्मीदवार उतारा जा सकता हैं.

    इसके पूर्व पिछले राज्य सरकार ने नागपुर में 2-2 संस्थान से उत्पन्न हो रही अड़चनों के कारण नागपुर सुधार प्रन्यास को बर्खास्त करने का आदेश जारी कर प्रक्रिया शुरू कर दी थी.कई जिम्मेदारी मनपा और NMRDA में विभक्त की जा चुकी थी.गत माह MVA ने नासुप्र पर राज्य सरकार प्रतिनिधि के तौर पर पश्चिम नागपुर के विधायक को विश्वस्त नियुक्त कर यह सन्देश दिया कि नासुप्र आज भी जीवित हैं.

    इसकी यह वजह दिख रही कि एक तरफ मनपा को बर्खास्त करने की योजना पर काम शुरू हैं तो दूसरी तरफ शहर में विकासकार्य नासुप्र के माध्यम से कर विकासकार्य में गति दी जाएगी।नासुप्र का अधिकांश क्षेत्र नागपुर शहर का बाहरी भाग हैं,इन भागों में MVA को बड़ी सफलता मिलने की आशा हैं,जिस पर काम किया जा रहा.
    अब देखना यह हैं कि अगले एक साल में MVA अपनी राजनैतिक रोटी सेकने के लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाती हैं और इसका कितना लाभ उन्हें मिलेगा,यह तो समय ही बताएगा।

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