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    Published On : Mon, Dec 28th, 2020

    कार्रवाई क्यों नहीं ? पाबंदी के बावजूद नायलॉन मांजे से उड़ रही पतंगे

    नागपुर. मकरसंक्रान्त को अभी कुछ ही दिन बचे है, ऐसे में कुछ दिन पहले से ही नायलॉन मांजे से पतंग उड़ानेवाले लोगों का उत्साह बढ़ गया है. सड़क के किनारे, छतों पर से पतंग उड़ानेवाले दिनभर पतंग उड़ा रहे है. लेकिन यह जिस मांजे से पतंग उड़ा रहे है, वो नायलॉन मांजा है. जो काफी खतरनाक और जानलेवा है. इस मांजे से पक्षियों के साथ इंसानो को भी खतरा है.शहर में खुलेआम नायलॉन मांजे की बिक्री की जा रही है और पतंगों के शौकीन भी धड़ल्ले से इसे खरीद रहे है. कुछ वर्षो में देखा गया है कि नागपुर शहर में ही कई वाहनचालक गले में नायलॉन मांजे के फसने के कारण दुर्घटनाओ के शिकार हुए है. क्योंकि यह मांजा हाथ में आ जाए तो बड़ी मुश्किल से टूटता है. जिसके कारण कई लोगों की गला कट जाता है. जानकारी के अनुसार करीब 5 साल पहले इसपर प्रतिबंद लगा था. बावजूद इसके मनपा की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण किसी भी तरह की कोई भी कार्रवाई मांजा बेचनेवालों पर नहीं हो रही है.

    चीनी मांजे के नाम से जाना जानेवाला यह खतरनाक प्लास्टिक उत्पादों में से एक है. यह करीब दस साल पहले चलन में आया और हल्का, मजबूत व सस्ता होने के कारण जल्द ही पूरे युवा वर्ग में छा गया. बीते आठ महीनों से बच्चों को पढ़ाई में ढील मिली हुई है इसलिए बरसात के बाद से बच्चे पतंग उड़ाने में बहुत सारा समय बिता रहे हैं. इससे शहर भर में पतंग, मंजे और इससे जुड़ी सामग्री जोरदार बिक्री बढ़ी हुई है. शहर के सभी तरफ खुले मैदान, खाली लेआउट और छतों पर चढ़कर बच्चे पतंगबाजी कर रहे हैं.

    नगर में जूनी शुक्रवारी, इतवारी, गोकुलपेठ आदि क्षेत्र में पतंग व मांजा की दूकानें स्टाइलिश पतंगों के साथ लगने लगी हैं. प्लास्टिक, जर्मन ताव, जिलेटिन व कपड़े से तैयार विविध तरह की पतंगें उपलब्ध हैं. बाजार में चाइना के नायलॉन मंजे पर प्रतिबंध है. विक्रेताओं के अनुसार उनकी दूकानों में दूकानों में 9 तार वाला मंजा, बरेली का 9 तार वाला मंजा उपलब्ध है. खुले तौर पर दूकानों में देसी मांजा दिखाई दे रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि अब भी कई विक्रेता ग्राहकों की मांग पर नायलॉन मंजा उपलब्ध करा रहे हैं. पतंग उड़ाने वाले बच्चों के हाथों में यह देखा जा रहा है.

    नायलॉन मंजा से हर साल बड़ी संख्या में पक्षी फंसकर घायल होते हैं और आखिर में मर जाते हैं. शहर के सभी इलाकों में नायलॉन मंजा जाल की तरह लिपटा हुआ नजर आ रहा है और यह कई सालों तक यहीं रहता है. पक्षियों के घुमावदार पंजे और नाखून इसमें फंस जाते हैं और पंख बुरी तरह फंस जाते हैं. खासकर यह रात के समय पेड़ों पर आकर बैठने वाले उल्लुओं के लिए ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है. इसके अलावा नायलॉन मंजे के साथ पतंगबाजी करने से हर साल कई लोग घायल होते हैं और कइयों की जानें जाती हैं.

    पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने अपील की है कि प्रशासन के संबंधित विभाग छुपाकर बेचे जा रहे नायलॉन मंजा के विक्रेताओं पर कार्रवाई करे. संक्रांति का पर्व पास आने के साथ ही साथ पतंग खरीदी का उत्साह जुनून में बदल रहा है. नायलॉन मंजा भी पूरे शहर में फैलता जा रहा है. यदि समय रहते इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो फिर यह जानलेवा साबित होगा

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