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    Published On : Wed, Jan 27th, 2021

    Video : समाजकल्याण विभाग की लापरवाही से सैकड़ों विद्यार्थी हो सकते है शिक्षा से वंचित

    नागपुर– नागपुर जिले के समाजकल्याण विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण सैकड़ों आरक्षित विद्यार्थियों को कॉलेज द्वारा ओपन में डाल दिया गया है. जिसके कारण अब सैकड़ो विद्यार्थीयो को समाज कल्याण विभाग की ओर से कास्ट वैलिडिटी समय पर नहीं मिलने के कारण अब कॉलेजो में एडमिशन लेने के लिए कॉलेज की ओर से उन्हें फ़ीस मांगी जा रही है.

    समाजकल्याण विभाग की इस लापरवाही को उजागर करने वाले एडवोकेट आशीष कटारिया है. समाज कल्याण विभाग को लेकर कटारिया कोर्ट में याचिका भी डालनेवाले है. जानकारी के अनुसार 12वी क्लास पास कर चुके विद्यार्थियों को शहर के विभिन्न कॉलेजो में एडमिशन लेने है. इसके लिए उन्होंने सीईटी की परीक्षा दी थी, इस परीक्षा के बाद उन्हें सेंट्रलाइज़्ड कॉलेज दिए गए.

    इसमें आरक्षित कैटेगरी के विद्यार्थी एनटी, एससी, एसटी और ओबीसी शामिल है. इन विद्यार्थोयों ने समाज कल्याण विभाग में कास्ट वैलिडिटी के लिए कुछ दिन पहले आवेदन किया था और वहां से इन्हे स्लिप मिली है. लेकिन अब तक कास्ट वैलिडिटी नहीं मिली है. अब ऐसे में कॉलेजो में एडमिशन के समय जमा करनेवाली कास्ट वैलिडिटी की डेट निकल चुकी है. जिसके कारण कॉलेजो का कहना है की अब इन आरक्षित विद्यार्थियों ओपन कैटेगरी में डाल दिया गया है. जिसकी वजह से अब इन विद्यार्थियों को लाखों रुपए फ़ीस भरनी होगी.

    कॉलेजो में इन्होने एडमिशन के लिए भी फॉर्म भर दिए. लेकिन समाजकल्याण विभाग की ओर से इन विद्यार्थियों को कास्ट वैलिडिटी समय पर नहीं मिलने के कारण कॉलेज मैनेजमेंट ने इन आरक्षित विद्यार्थियों को ओपन कैटेगरी में डाल दिया है और इनसे अब लाखों रुपए की मांग की जा रही है. पिछडे जातियों के होने के कारण इन्हे आरक्षण मिलता है. लेकिन 1 लाख रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक की फ़ीस कॉलेजो की ओर से मांगी जा रही है. जिसके कारण विद्यार्थियों के पालक एडवोकेट आशीष कटारिया के पास पहुंचे और उन्हें पूरी समस्या से अवगत कराया. इसके बाद कटारिया समाजकल्याण के अधिकारियो से मिले और उनको इन विद्यार्थियों की परिस्थिति और विभाग की गलती के बारे में बताया. इसके बाद कटारिया ने ये भी कहा की इस मामले को लेकर वे कोर्ट जाएंगे.

    सैकड़ो की संख्या में आरक्षित विद्यार्थियों को कास्ट वैलिडिटी नहीं मिलने के कारण इन्हे अनारक्षित श्रेणी में डाल दिया गया है. अब कॉलेजो में इनकी कास्ट वैलिडिटी जमा नहीं करने के कारण इन्हे ओपन में अपने मन से डाल दिया गया.अब इनके पास दो ही रास्ते बचते है, या तो इन आरक्षित गरीब विद्यार्थियों को लाखों रुपए कॉलेजो में जमा कराने होंगे, या फिर ज्यादतर विद्यार्थी ऐसे है, जिनके पालकों के पास इतना पैसा नहीं है और ऐसी परिस्थिति में वे कॉलेजो में एडमिशन नहीं ले पाएंगे. जिसके लिए पूरी तरह से जिला परिषद् का समाजकल्याण विभाग ही जिम्मेदार होगा.


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