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    Published On : Wed, Dec 9th, 2020

    विभाग प्रमुखों की शह पर लेन-देन पद्धति से मिलता हैं प्रोविजन

    CE,SE,EE ने साधी चुप्पी,मामला सार्वजानिक करने वालों को टटोल रही मुख्य सूत्रधार,नायडू 5-5 हज़ार तो शेष 50से 100 रूपए प्रति लाख वसूलते हैं

    नागपुर : नागपुर महानगरपालिका में खासकर सिविल कार्यों के लिए प्रोविजन देने की जिम्मेदारी CE,SE,EE अधीनस्त PWD कार्यालय की हैं.इस कार्यालय में वर्षों से कुंडली मार तैनात कर्मी प्रोविजन देने/एंट्री करने के नाम पर बिना लेन-देन किए काम नहीं करते। इस क्रम में नायडू सह आधा दर्जन कर्मी शामिल हैं,मामला सार्वजानिक होते ही मुख्य सूत्रधार नायडू द्वारा मामले का पर्दाफाश करने वालों को टटोला जा रहा,वहीं दूसरी ओर विभाग के दिग्गज अधिकारी मामले को नज़रअंदाज कर वर्षों से चल इस गोरखधंधे को हवा दे रहे.
    मनपा द्वारा विकासकार्य के फाइलों पर प्रोविजन देने और GOVERMENT GRANT के फाइलों के प्रोविजन की एंट्री मनपा PWD में करने का नियम हैं.मनपा PWD की मुखिया CE,SE,EE के नाक के नीचे प्रोविजन देने/प्राप्त प्रोविजन की एंट्री करने के लिए विभाग के नायडू सह सभी जिम्मेदार कर्मी बिना पैसे लिए न प्रोविजन देते और न ही प्राप्त प्रोविजन की एंट्री करते। इनमें नायडू सबसे ज्यादा डिमांड करती हैं,ठेकेदारों के अनुसार 5-5 हज़ार की मांग प्रति फाइल करने के बाद ही प्रोविजन मिलता या उनकी एंट्री करती हैं.शेष 50 से 100 रूपए प्रति लाख के दर से प्रोविजन देते या एंट्री करते हैं.DPDC/GOVERMANT GRANT के फाइलों पर प्रोविजन देने या प्राप्त प्रोविजन की एंट्री करने वाला टेबल अलग हैं,इसके कामकाज कंचन करते हैं,यह भी लगभग अन्य की भांति प्रति लाख 50 रूपए वसूलते हैं.

    स्थाई समिति बजट में विभिन्न ‘हेड’ द्वारा विकासकार्यों के लिए निधि का प्रावधान करती हैं.अमूमन PWD से जुड़े सभी ‘हेड’ से सम्बंधित फाइलों पर प्रोविजन देने/प्राप्त प्रोविजन की एंट्री करने का काम नायडू और उनकी मंडली की निगरानी में होता हैं.

    काम के शुरुआत में प्रोविजन लेने और प्राप्त प्रोविजन की एंट्री करवाने के बाद जब भुगतान के लिए बिल जमा करवाने की बारी आती हैं तब सम्बंधित ठेकेदारों से उक्त मंडली से सामना होता हैं तब उन्हें जेब ढीली किये बगैर राहत नहीं मिलती,या फिर जब तक जेब ढीली नहीं करते तब तक फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाती।

    निष्पक्ष-कर्मठ CE के नाक के नीचे चल रहे उक्त गोरखधंधे से CE की कार्य प्रणाली पर मनपा के त्रस्त छोटे-छोटे ठेकेदार उंगलियां उठा रहे,जो चिंतनीय हैं.इसलिए मनपा के सैकड़ों छोटे-छोटे ठेकेदारों ने ‘NAGPUR TODAY’ के मार्फ़त साफ़-सुथरी छवि वाली CE से मांग की हैं कि उक्त गोरखधंधे में लिप्त नायडू सह अन्य सभी प्रोविजन देने वाले अथवा प्राप्त प्रोविजन की एंट्री करने वाले पर कड़क कार्रवाई करें अन्यथा एंटी करप्शन आदि सम्बंधित विभाग की शरण में जाना पड़ेगा,जिससे होने वाली नुकसान की जिम्मेदारी विभाग प्रमुख की होंगी।

    उल्लेखनीय यह हैं कि पूर्व मनपायुक्त तुकाराम मुंढे के कार्यकाल में मनपायुक्त कार्यालय में वित्त विभाग के कर्मी राव को उनके कक्ष में सीधे जाने की अनुमति नहीं थी,आज वे वित्त विभाग सम्बन्धी मामलों में काफी हस्तक्षेप कर रहे,इसके अलावा अपने करीबी परिजनों के ग़ैरकृतों पर संरक्षण देकर उनका हौसला बुलंद कर मनपा के सैकड़ों छोटे-छोटे ठेकेदारों का आर्थिक शोषण को हवा दे रहे.

    इस मामले का सार्वजानिक होने बाद विभाग के आला अधिकारियों ने गंभीरता से न लेना अर्थात विभाग में सभी लेन-देन में शामिल हैं,ये छोटी तो विभाग में बड़ी-बड़ी मछलियां मनपा और शहर के नागरिकों का कर रूपी पैसे को चुना लगा रहे,यह विडंबना नहीं तो और क्या हैं ?

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